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saran news : स्वघोषणा पत्र ही अंतिम निर्णय नहीं, जमीन पर जाकर होगी जांच

Updated at : 31 Mar 2025 9:15 PM (IST)
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saran news : स्वघोषणा पत्र ही अंतिम निर्णय नहीं, जमीन पर जाकर होगी जांच

saran news : स्वघोषणा पत्र जमा करने की तिथि बढ़ेगी या नहीं संशय बरकरार, सारण में 6.2 लाख स्वघोषणा पत्र हो चुके हैं जमा, अब भी 40 फ़ीसदी बाकी

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छपरा. भूमि सर्वेक्षण को लेकर डेट बढ़ेगी या नहीं इसको लेकर असमंजस बरकरार है. सारण के अधिकारी भी राज्य से आदेश आने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि इतना जरूर कह रहे हैं कि 31 मार्च के बाद भी कुछ दिनों तक जमीन संबंधी स्वघोषणा के लिए पोर्टल को खुला रखा जायेगा. इस पोर्टल के माध्यम से लोग ऑनलाइन या फिर विभाग की ओर से लगाये गये शिविर में ऑफलाइन कागजात जमा कर सकते हैं.

1600 राजस्व ग्राम में चल रहा है सर्वे

अंचल के रैयतों की सुविधा के लिए प्रखंड में एक स्थायी शिविर स्थापित किया गया है, जहां किसान या रैयत अपने दस्तावेज जमा कर सकते हैं. जिले में राजस्व ग्रामों की संख्या 1804 है. लेकिन, फिलहाल 1600 राजस्व ग्राम के लिए सर्वे का काम चल रहा है. 204 गांव का सर्वे अभी नहीं हो रहा है. इनमें 90 नगर निकाय में हैं और 114 और असर्वेक्षित भूमि के तहत है. इन गांव में अभी सर्वेक्षण का कार्य नहीं होगा इसके लिए विशेष तिथियां निर्धारित होंगी, जिसमें नये सिरे से सर्वेक्षण का कार्य होगा.

6.2 लाख दस्तावेज हुए जमा

सारण में अभी तक लगभग 6.2 लाख लोगों ने स्व घोषणा पत्र जमा किया है. 40 लाख की आबादी वाले जिले में उम्मीद जतायी जा रही है कि यह संख्या 60 फ़ीसदी के आसपास है. अभी 40 फ़ीसदी लोग जमीन संबंधित दस्तावेज जमा नहीं किये हैं. हर 10 में से 6 आदमी जमा कर दिया है. जो लोग जमा नहीं कर रहे हैं, उनमें कई तरह के संशय बरकरार है और उनके पास विभिन्न प्रकार के कागजात भी नहीं हैं. वे अभी अपना कागजात तैयार कर रहे हैं. स्व घोषणा पत्र जमा होने के बाद इसकी जांच होगी की जमीन संबंधित किया गया दावा कितना सही है. ऑन द स्पॉट वेरीफिकेशन होगा, जिसका दावा सही रहेगा, उसका नाम खतियान में शामिल किया जायेगा.

तीन बार आपत्ति का मिलेगा मौका

जिला बंदोबस्त पदाधिकारी संजय कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण के दौरान सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी जमीन का सर्वेक्षण सही तरीके से हो. अगर सर्वेक्षण में कोई गलती हो जाती है, तो रैयतों के पास गजट प्रकाशन से पहले तीन बार आपत्ति दर्ज करने का मौका होगा, जहां वे अपनी जमीन से संबंधित गलतियों को सुधार सकते हैं. अंतिम प्रकाशन के बाद सुधार की संभावना बहुत कम हो जाती है.

पोर्टल बंद होने को लेकर भी संशय

जिले के अधिकारियों ने बताया कि उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग स्वघोषणा की अंतिम तिथि को बढ़ाने या फिर पोर्टल को बंद करने के संबंध में निर्णय लेगा. उन्होंने बताया कि अब भी स्वघोषणा के लिए बड़ी संख्या में जमीन मालिक बचे हुए हैं. कई जमीन मालिकों ने अपने पुश्तैनी जमीन का डाक्यूमेंट्स उपलब्ध नहीं होने की शिकायत की है. उन्हें ये डाक्यूमेंट्स राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे में संभावना बरकरार है की डेट बढ़ेगी. जमीन सर्वे के लिए स्वघोषणा की अंतिम तिथि 31 मार्च के बाद भी कुछ दिनों तक पोर्टल खुला रहेगा. इस पोर्टल पर पहले की तरह ही कुछ दिन तक स्वघोषणा और वंशावली अपलोड की जा सकेगी.

जमीन मालिकों की परेशानी

जमीन मालिकों का आरोप है कि रसीद में सीओ और कर्मचारियों ने खेल कर रखा है. जब भी उन्होंने इसे सुधरवाने की कोशिश की, तो या तो उनका आवेदन रद्दी की टोकरी में चला गया या फिर उनसे नाजायज पैसों की मांग की गयी. रसीद में खाता नंबर तो दिया हुआ है, लेकिन खेसरा यानी प्लॉट नंबर है ही नहीं. ऐसे में इस स्वघोषणा पत्र कैसे जमा हो पायेगा. आरोपों को सही न भी मानें, तो इस रसीद को कैसे गलत ठहरा दें. रैयत सरकार से यही सवाल पूछ रहे हैं कि अल्टीमेटम रैयतों को क्यों दिया जा रहा है. अल्टीमेटम तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए कि पहले पंचायत वार कैंप लगाकर इन रसीदों को ठीक करें. उससे भी बड़ी बात ये कि जिला मुख्यालय की जमीन रसीदों का ऐसा हाल कर दिया गया है, तो बाकी प्रखंड में क्या हाल होगा. वैसे भी स्वघोषणा की तारीख सरकार कितनी ही क्यों न बढ़ा दे, रसीद ठीक और जायज रहेगी ही नहीं, तो कोई किसान या जमीन मालिक अपने पैरों पर स्वोघषणा पत्र भरकर क्यों कुल्हाड़ी मारेगा. किसानों में इस तरह के अल्टीमेटम से भारी आक्रोश है. सीइओ, रिकॉर्ड रूम और रजिस्ट्री कार्यालय में भी काफी खेल हुआ है, ऐसा लोगों का कहना है.

क्या कहते हैं जिला बंदोबस्त पदाधिकारी

जिला बंदोबस्त पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि 31 मार्च तक स्वघोषणा पत्र जमा करने का डेट निश्चित था, लेकिन अब भी पोर्टल खुला हुआ है और जमा किया जा सकता है. स्वघोषणा पत्र जमा करने में डरने की कोई जरूरत नहीं है, यह अंतिम निर्णय नहीं है. जमीन पर जाकर होगी जांच.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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