सारण जिला परिषद उपाध्यक्ष के खिलाफ एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, सदस्यों ने अध्यक्ष को भेजा पत्र
सारण जिला परिषद उपाध्यक्ष के खिलाफ पार्षदों ने एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है. पूर्व में तकनीकी आधार पर रद्द हुए प्रस्ताव के बाद अब नया प्रस्ताव लाया जा रहा है. पार्षदों ने उपाध्यक्ष पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और भेदभाव के आरोप लगाए हैं.
सारण जिला परिषद उपाध्यक्ष के खिलाफ एक बार फिर पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस संबंध में पार्षदों ने अध्यक्ष को एक पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि पूर्व में प्रस्तुत प्रथम अविश्वास प्रस्ताव व उस पर आधारित सूचना 4 जून को पटना उच्च न्यायालय सीडब्ल्यूजेसी संख्या-8468 of 2026 में पारित आदेश 16 जुलाई से रद्द कर दिया गया था. यह स्पष्ट रूप से उल्लेखनीय है कि रद्दीकरण प्रस्ताव की विषय-वस्तु आरोपों की सत्यता या हस्ताक्षरकर्ता सदस्यों की पात्रता के आधार पर नहीं हुआ था.
सारण जिले की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें.
कहा गया है कि यह विशुद्ध रूप से एक तकनीकी व प्रक्रियागत आधार पर हुआ था, अर्थात् बैठक की तिथि धारा 70(4)(i) की सात दिन की सांविधिक अवधि के भीतर निर्धारित नहीं की गई थी. ऐसे में प्रथम अविश्वास प्रस्ताव के तकनीकी आधार पर रद्दीकरण के कारण निर्धारित विशेष बैठक कभी सम्पन्न ही नहीं हुई. ऐसे में प्रस्ताव न तो सदस्यों के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत हुआ, न उस पर कोई चर्चा हुई और न ही उस पर कोई मतदान हुआ. नियमानुसार, जब तक किसी अविश्वास प्रस्ताव पर वास्तव में मतदान न हो, तब तक वह प्रस्ताव विधिक रूप से पूर्ण या निर्णीत नहीं माना जा सकता. न तो वह पारित हुआ माना जाएगा और न ही अस्वीकृत.
बताया गया कि इस तरह एक अपूर्ण व अनिर्णीत प्रस्ताव, सांविधिक प्रावधानों के अंतर्गत, सदस्यों के पुनः अविश्वास प्रस्ताव लाने के अधिकार पर कोई रोक उत्पन्न नहीं करता है. क्योंकि यह रोक विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए है जहां प्रस्ताव पर मतदान होकर वह अस्वीकृत हुआ हो. ऐसे में पहले ले गए अविश्वास प्रस्ताव पर आधारित कार्यवाही मतदान से पूर्व ही तकनीकी आधार पर समाप्त हो गई तथा कोई निर्णय अस्तित्व में नहीं आया, इसलिए दूसरा अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा रहा है जो कि वैधानिक, ग्राहय एवं धारा 70 (4) (i) के अनुरूप है. इसे विचारार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है. इस संबंध में नियमानुसार शीघ्र विशेष बैठक बुलाकर इस पर विचार एवं अपेक्षित कार्रवाई की जाय.
यह लगाए गए आरोप
- जिला परिषद उपाध्यक्ष के रूप में अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का ठीक ढंग से निर्वहन नहीं करना.
- जिला परिषद के कार्यों में अनावश्यक रूप से अवरोध उत्पन्न करना.
- जिला परिषद सदस्यों के प्रति भेद-भाव करना एवं कुशल व्यवहार नहीं रखना.
- जिला परिषद की उपाध्यक्ष, जिला परिषद की सामाजिक न्याय समिति की पदेन अध्यक्ष हैं, जिसकी आज तक कोई बैठक नहीं हो सकी है.
यह भी पढ़ें : JPU के छात्रों को 7 से 10 दिन में मिलेगी डिग्री, जानिए क्या है कॉलेज का अर्जेंट मोड और कैसे करें आवेदन
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










