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Saran News : दिघवारा प्रखंड के झौवा गांव के दर्जनों मुस्लिम परिवार वर्षों से बना रहें हैं छठ पूजा के लिए आरता पात

Updated at : 21 Oct 2025 9:48 PM (IST)
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Saran News : दिघवारा प्रखंड के झौवा गांव के दर्जनों मुस्लिम परिवार वर्षों से बना रहें हैं छठ पूजा के लिए आरता पात

भारतीय समाज और संस्कृति समन्वय की रही है. सामाजिक सौहार्द उसकी बुनियाद में है. इस बुनियाद को और समृद्ध करने की कोशिश अभी जारी है.

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दिघवारा. भारतीय समाज और संस्कृति समन्वय की रही है. सामाजिक सौहार्द उसकी बुनियाद में है. इस बुनियाद को और समृद्ध करने की कोशिश अभी जारी है. पर्व त्योहार में इसकी बानगी भी आसानी देखी जा सकती है. इसका उदाहरण सारण जिले के दिघवारा प्रखंड में भी देखने को मिलता है. छठ महापर्व में भगवान भास्कर को अर्घ्य देने और कोसी भरने के दौरान जिस आरता पात का उपयोग किया जाता है उसे दिघवारा प्रखंड के झौवा पंचायत के दर्जनों मुस्लिम परिवारों के द्वारा बनाया जाता है.

माना जाता है कि मुस्लिम परिवार ने शताब्दी वर्ष पूर्व ही इसके निर्माण की शुरुआत की थी. हालांकि आज पूरे गांव व आसपास के क्षेत्र में सभी जातियों के लोगों द्वारा इसका निर्माण किया जा रहा है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां की लड़कियां जब अपने ससुराल जाती है तो इस हुनर और कला को अपने साथ ले जाती है. वह अपने ससुराल में भी इसका प्रशिक्षण अन्य लोगों को देती है. नतीजतन कला का यह प्रवाह निरंतर बढ़ता जाता है.

झौंवा में वाणिज्यिक स्तर पर होता है आरता पात का निर्माण

आरता पात का निर्माण इस पंचायत में बड़े पैमाने पर होता है. गांव के सभी जाति, धर्म बिरादरी के लोग अप्रैल मई के महीने से ही आरता पात के निर्माण में जुट जाते हैं. इसके निर्माण में सबसे अधिक योगदान महिलाओं का होता है. घर में ही मेहनत कर आरता पात का निर्माण कर दो पैसे जुटाकर परिवार को चलाने में महिलाएं अपना योगदान देती है.

लोकल फॉर वोकल का संदेश देता है झौवा का आरता पात

दिघवारा प्रखंड का झौवा पंचायत आरता पात निर्माण का हब वर्षों से बना हुआ है. यह लोकल फॉर वोकल का संदेश दे रहा है. घर बैठे इस रोजगारपरक कार्य से ग्रामीण आज आत्म निर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं. स्थानीय सेराज अली, आफताब आलम, इसताक आलम, मो शहाबुद्दीन आदि लोगों का कहना है कि इसके निर्माण में जितनी मेहनत है उतना मुनाफा नहीं है. साथ ही स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. दमा, एलर्जी, सहित आंख खराब होने जैसी बीमारी से ग्रामीण ग्रसित हो जाते हैं लेकिन पुश्तैनी काम होने से व आस्था का प्रतीक होने से ग्रामीण आरता पात के निर्माण में साल भर जुटे रहते हैं. सरकार व प्रशासन की उपेक्षा से आरता पात का निर्माण करने वाले लोगों को कोई सहायता नहीं मिल पाती है. यह आरता पात संस्कृति के साथ-साथ आर्थिक पक्ष को भी समृद्ध करता है.

अकवन की रुई से बनता है आरता पात

अर्ध की महत्वपूर्ण सामग्री में आरता पात अकवन की रुई से बनता है. अकवन की धुनाई कर रुई बना मिट्टी की ढकनी पर गोल आकार देकर उसे गर्म पानी में उबाला जाता है. उबालने के बाद एक-एक पत्ते को अलग-अलग कर सूखाने के बाद उसे सद्भावना के रंग में तैयार किया जाता है. मालूम हो कि यहां शताब्दी पूर्व आरता पात के निर्माण का इजाद मुस्लिम परिवारों द्वारा किया गया था. तब से यहां हिंदू मुस्लिम समेत सभी जाति के लोग इसका निर्माण करते हैं. शमशीदा खातून, सबीहा खातून, साहिना खातून व नजमा खातून ने बताया कि आरता पात का निर्माण हमारा पुश्तैनी धंधा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ALOK KUMAR

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