सारण डबल डेकर प्रोजेक्ट पर संकट: 78 मकान मालिकों को नोटिस, मुआवजे की जगह म्यूटेशन रद्द करने की तैयारी

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नोट: फोटो नंबर 21 सीएचपी 4 है कैप्सन होगा-निर्माणाधीन डबल डेकर  | Prabhat Khabar Network

निर्माणाधीन डबल डेकर  | Prabhat Khabar Network

छपरा में करोड़ों की लागत से बन रहे डबल डेकर प्रोजेक्ट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिला प्रशासन ने 78 मकान मालिकों को नोटिस थमाते हुए जमीन पर अपना दावा ठोका है। मुआवजे के बजाय, म्यूटेशन रद्द करने की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।

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सारण: नगर निगम क्षेत्र में लगभग 696 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे डबल डेकर प्रोजेक्ट की गांधी चौक–नेहरू चौक शाखा पर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. जिला प्रशासन ने दावा किया है कि जिस जमीन पर करीब 200 मकान और दुकानें बनी हैं, वह सरकारी भूमि है. इसी आधार पर 78 जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर उनकी जमाबंदी (म्यूटेशन) रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

इस कार्रवाई के बाद प्रभावित लोगों में हड़कंप मच गया है. जिन लोगों को उम्मीद थी कि उनकी जमीन अधिग्रहित होने पर मुआवजा मिलेगा, अब उन्हें आशंका है कि म्यूटेशन रद्द होने पर मुआवजा भी नहीं मिलेगा.

अपर समाहर्ता न्यायालय में चल रही कार्रवाई

जिला प्रशासन ने संबंधित जमीन की जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया अपर समाहर्ता (एडीएम) न्यायालय में शुरू कर दी है. नोटिस प्राप्त लोगों से निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा गया है.

प्रशासन का दावा: यह 'घुड़दौड़' की सरकारी जमीन

प्रशासन का कहना है कि विवादित भूमि सरकारी है और इसे पहले 'घुड़दौड़ स्थल' के नाम से जाना जाता था.

प्रशासन के अनुसार वर्ष 1936 के आसपास यह भूमि जिला प्रशासन के नियंत्रण में थी और यहां प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होती थीं. बाद में बिना अनुमति लोगों ने जमीन पर कब्जा कर मकान और दुकानें बना लीं तथा समय के साथ उनका म्यूटेशन भी करा लिया.

राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन वास्तव में सरकारी थी तो संबंधित अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों ने निजी लोगों के नाम जमाबंदी कैसे खोल दी.

लोगों ने मांग की है कि यदि सरकारी जमीन पर गलत तरीके से म्यूटेशन हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.

हाईकोर्ट जाने की तैयारी

नोटिस मिलने के बाद कई प्रभावित जमीन मालिक कानूनी सलाह लेने में जुट गए हैं. जानकारी के अनुसार, कई लोग इस कार्रवाई को पटना हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं.

मुख्य हिस्से में निर्माण जारी

हालांकि, विवाद केवल गांधी चौक से नेहरू चौक वाले हिस्से तक सीमित बताया जा रहा है. छपरा बस स्टैंड से भिखारी ठाकुर चौक तक परियोजना के मुख्य हिस्से में फिलहाल निर्माण कार्य सामान्य रूप से जारी है.

क्या बोले कार्यपालक अभियंता

पुल निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता पमित कुमार ने कहा "हम लोगों ने जिला प्रशासन से भूमि अधिग्रहण कर परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है. जिला प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन है. म्यूटेशन रद्द होने के बाद जमीन विभाग को उपलब्ध करा दी जाएगी. इस संबंध में 78 लोगों को नोटिस जारी किया गया है."

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