नियमित टीकाकरण को गति देने के लिए प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित, जीरो-डोज बच्चों पर रहेगा विशेष फोकस

कार्यशाला का उद्घाटन करते चिकित्सक
Saran News : सारण प्रमंडल में नियमित टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में जीरो-डोज बच्चों के टीकाकरण पर विशेष जोर दिया गया और उन्हें शत-प्रतिशत टीकाकृत करने का संकल्प लिया गया.
Saran News : नियमित टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को शहर के एक निजी होटल में प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्घाटन क्षेत्रीय अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सागर दुलाल सिन्हा और सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. पीसीआई संस्था के सहयोग से आयोजित इस एकदिवसीय कार्यशाला में जीएवीआई (GAVI) कार्यक्रम और जीरो-डोज बच्चों के टीकाकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई.
स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाओं के अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र महतो, सिवान के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक प्रशांत कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद कुमार, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार, डीएम एंड ई ब्रजेश कुमार सहित यूनिसेफ की ओर से मोना, शादान अहमद और धर्मेंद्र उपस्थित रहे. इसके अलावा पीसीआई संस्था से कमता पाठक, पुतुल कुमारी और अमित यादव, सारण के डीसी दिलीप कुमार, सिवान के डीसी सत्य प्रकाश तथा दोनों जिलों के प्रखंड समन्वयकों ने भी कार्यशाला में भाग लिया.
सारण और सिवान के सात प्रखंडों में चल रहा है अभियान
कार्यशाला में बताया गया कि जीएवीआई कार्यक्रम के तहत सारण जिले के चार और सिवान जिले के तीन प्रखंडों में नियमित टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है. इस दौरान उन बच्चों की पहचान और टीकाकरण पर विशेष जोर दिया गया, जो पेंटा-1 वैक्सीन से वंचित रह गए हैं या निर्धारित समय पर टीका नहीं लगवा सके. ऐसे बच्चों के परिवारों को चिह्नित कर उन्हें टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा.
जागरूकता से ही सफल होगा अभियान
क्षेत्रीय अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सागर दुलाल सिन्हा ने कहा कि समुदाय में जागरूकता फैलाकर ही नियमित टीकाकरण अभियान को सफल बनाया जा सकता है. उन्होंने छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उनका शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया. सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने भी कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाकर ही जीरो-डोज बच्चों की संख्या कम की जा सकती है.
प्रदेश के 25 जिलों में संचालित है जीएवीआई कार्यक्रम
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि जीएवीआई कार्यक्रम बिहार के 25 जिलों के 100 प्रखंडों में कुल 1,289 सत्र स्थलों पर संचालित हो रहा है. इनमें से पीसीआई संस्था 15 जिलों के 66 प्रखंडों में 869 सत्र स्थलों पर कार्यक्रम का संचालन कर रही है, जबकि शेष 10 जिलों में यह जिम्मेदारी वाधवानी एआई नामक संस्था निभा रही है.
दोनों जिलों में 400 बच्चों में दिखी टीकाकरण को लेकर हिचकिचाहट
कार्यशाला के दौरान साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सारण जिले के 40 सत्र स्थलों पर 4,854 बच्चों में से 216 बच्चे (4.44 प्रतिशत) टीकाकरण के प्रति हिचकिचाहट या प्रतिरोध की श्रेणी में पाए गए. वहीं सिवान जिले के 49 सत्र स्थलों पर 4,225 बच्चों में से 184 बच्चे (4.35 प्रतिशत) इस श्रेणी में चिह्नित किए गए. दोनों जिलों को मिलाकर 89 सत्र स्थलों पर 9,079 बच्चों में से 400 बच्चे (4.40 प्रतिशत) टीकाकरण के प्रति हिचकिचाहट या प्रतिरोध की श्रेणी में पाए गए.
जीरो-डोज मुक्त सारण प्रमंडल बनाने का लिया संकल्प
कार्यशाला के अंत में स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ, पीसीआई और अन्य सहयोगी संस्थाओं के अधिकारियों ने छूटे हुए और वंचित बच्चों की पहचान कर उनका शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया. अधिकारियों ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से सारण प्रमंडल को जीरो-डोज मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाएगा.
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By Prabhat Khabar News Desk
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