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Bihar: हत्या के मामले में पूर्व विधायक तारकेश्वर सिंह को उम्रकैद, 28 साल बाद मिला न्याय

Updated at : 29 Apr 2024 1:02 PM (IST)
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Bihar: हत्या के मामले में पूर्व विधायक तारकेश्वर सिंह को उम्रकैद, 28 साल बाद मिला न्याय

Bihar: सारण जिले के मशरक से तीन बार विधायक रहे तारकेश्वर प्रसाद सिंह को कोर्ट ने हत्या और अपहरण के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है. 28 साल बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.

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Bihar: छपरा. सारण जिले के मशरक से तीन बार विधायक रहे तारकेश्वर प्रसाद सिंह को हत्या एवं अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा मिली है. कोर्ट ने पानापुर थाना क्षेत्र के तुर्की निवासी शत्रुघ्न प्रसाद गुप्ता के 1996 में अपहरण के बाद हत्या मामले में शामिल होने का दोषी पाया है. छपरा के एमपी-एमएलसी कोर्ट ने इस मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसी कांड में दो अभियुक्त संजीव सिंह एवं पूर्व मुखिया देवनाथ राय को कोर्ट ने साक्षय के अभाव में बरी कर दिया है.

वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये सुनाई गयी सजा

सोमवार को जेल से ही वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये उनकी पेशी हुई. एमपी- एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश सुधीर कुमार सिन्हा ने पानापुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के दोषी पूर्व विधायक पर भादवि की धारा 302, 364, 201 व 27 आर्म्स एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई. इससे पहले 19 अप्रैल को उन्हें दोषी ठहराया गया था. अपर लोक अभियोजक ध्रुवदेव सिंह ने अभियोजन की ओर से डॉक्टर, अनुसंधानकर्ता समेत कुल छह गवाहों की गवाही न्यायालय में कराई. दोषी करार होने के बाद पूर्व विधायक को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था.

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गोली मारने का दिया था आदेश

इस हत्याकांड के सूचक पानापुर के तुर्की ग्राम निवासी बाबूलाल गुप्ता ने 10 जनवरी 1996 को अपने भाई शत्रुघ्न प्रसाद को गोली मारने व घायल अवस्था में जबरन उठाकर ले जाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी. प्राथमिकी में उन्होंने न्हों कहा था कि वह अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी सात-आठ मोटरसाइकिल पर दो-दो व्यक्ति सवार होकर किराना दुकान पर पहुंचे. सभी के हाथ में राइफल व बंदूक थी. बाइक से उतरते ही तारकेश्वर सिंह ने आदेश दिया कि गोली मारो, इतने में उनके निजी अंगरक्षक ने गोली चला दी. उनके भाई शत्रुघ्न प्रसाद गोली लगते ही जमीन पर गिर गए. बाद में मोटरसाइकिल सवार लोग उनके भाई को अगवा कर ले गए. काफी खोजबीन के बाद उनके भाई का शव दो दिन बाद मोतिहारी के डुमरिया पुल के नीचे नदी में मिला था.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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