बीडीओ व एमओ पर मामला दर्ज

Published at :08 Apr 2017 6:38 AM (IST)
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बीडीओ व एमओ पर मामला दर्ज

छपरा(कोर्ट) : रिश्वत के रूप में दो लाख रुपये नहीं देने पर प्रखंड के विकास पदाधिकारी और मार्केटिंग अधिकारी द्वारा एक राइस मिल के संचालक के साथ गाली गलौज और मारपीट किये जाने का एक मामला संचालक ने सीजेएम न्यायालय में दर्ज कराया है. उक्त मामला गड़खा प्रखंड के साधपुर निवासी व फुलवरिया स्थित सरस्वती […]

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छपरा(कोर्ट) : रिश्वत के रूप में दो लाख रुपये नहीं देने पर प्रखंड के विकास पदाधिकारी और मार्केटिंग अधिकारी द्वारा एक राइस मिल के संचालक के साथ गाली गलौज और मारपीट किये जाने का एक मामला संचालक ने सीजेएम न्यायालय में दर्ज कराया है. उक्त मामला गड़खा प्रखंड के साधपुर निवासी व फुलवरिया स्थित सरस्वती जी राइस मिल के संचालक भरत प्रसाद ने दर्ज कराते हुए दोनों पदाधिकारियों को अभियुक्त बनाया है.
आरोप है कि दोनों अधिकारी उसके राइस मिल पर आये और चारों तरफ घूम कर निरीक्षण किया और सब सही बताते हुए कहा कि तुम दो लाख रुपये दे दो और आराम से अपना काम करो , जब उसने रुपये देने में असमर्थता जतायी तो वे धमकी देते हुए गये कि पैसा तो तुमको देना ही होगा. उसके कुछ घंटा के बाद वे लोग पुलिस के साथ आये और जबरन गोदाम का ताला तोड़ने लगे जिसका विरोध करने पर दोनों ने गाली गलौज व मारपीट किया और ताला तोड़ कर निरीक्षण करने लगे, फिर भी कुछ नहीं मिला तो अलग रखे खराब चावल को उठा कर रख लिये और धमकी देते हुए चले गये.
शिक्षा की तमाम योजनाओं से दूर गरीब बस्ती के बच्चे
शहर के वार्ड संख्या 24 में स्थित स्लम बस्ती के आसपास कोई स्कूल नहीं है. कुछ वर्ष पूर्व एक प्राथमिक विद्यालय चलता भी था जो जगह के अभाव में बंद हो गया है. ऐसे में बस्ती के तकरीबन 50 बच्चे आज भी स्कूली शिक्षा से वंचित हैं. रेलवे लाइन के पार एक प्राथमिक विद्यालय है पर छोटे बच्चों को वहां भेजने में दुर्घटना का खतरा बना रहता है.
छपरा(नगर) : सुबह के करीब 8 बजे छपरा के शहरी क्षेत्र में स्थित एक गरीब बस्ती का नजारा और कैमरे में कैद वहां की कुछ तसवीरें बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर हो रहे विकास के वादे और समाज के हर वर्ग को शिक्षित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के तमाम दावों की हकीकत बयान कर रही है. यह तसवीर शहर के दहियांवा टोला स्थित एक ऐसे स्लम एरिया की है जहां के अधिकतर बच्चे शिक्षा से कोसों दूर हैं. बस्ती के ये बच्चे पढ़ना तो चाहते हैं और इसी उम्मीद में सुबह अपनी बस्ती में ही एक साथ बैठकर ककहरा और गिनती दोहराते हैं, पर समस्या ये है कि पढ़ने की चाह रखने वाले इन बच्चों को पढ़ाने वाला ही कोई नहीं है.
स्लम एरिया होने के कारण इस बस्ती के तरफ प्रशासनिक पदाधिकारियों तथा जन प्रतिनिधियों का ध्यान कम रहता है. चुनाव के दौरान सत्ता के गलियारों की चकाचौंध से निकल कर कुछ सियासी नुमाइंदे चंद पल के लिए यहां आकर अपना वोट जरूर सुरक्षित कर जाते हैं पर इन के भविष्य की सुरक्षा को लेकर दुबारा कोई भी इनकी गलियों का रुख नहीं करता है. हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों ने इस बस्ती के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा जरूर उठाया और कई बार शिविर लगाकर बच्चों के बीच पाठशाला भी लगायी पर उनकी पाठशाला भी इन बच्चों के बीच महज अक्षर ज्ञान देने तक ही सीमित रह गयी और व्यवस्थित शिक्षा को लेकर कोई ठोस विकल्प नहीं निकल सका.
वैसे इस बस्ती में एक वर्ष पूर्व एक आंगनबाड़ी केंद्र चलता था और छोटे बच्चों को कम से कम साक्षर बनाने का एक प्रयास जरूर शुरू हुआ था पर केंद्र के लिए स्थायी जगह उपलब्ध नहीं हो पाने से अब यह केंद्र भी इनकी पहुंच से दूर हो गया है. वहीं बस्ती के आसपास एक भी सरकारी स्कूल नहीं है. रेलवे लाइन के पार एक स्कूल है भी तो वहां तक जाना इन बच्चों के लिए जान जोखिम में डालने के बराबर है. सुबह से शाम दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में ही बीत जाता है.
दूसरे के घरों की गन्दगी साफ़ करने वाले लोगों में इतनी समझ और चाव जरूर है कि हमारे बच्चे भी पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बन सकें. गरीब बस्ती के इन बच्चों के पास पढ़ने के लिए टेबल और कुरसी तो नहीं है पर जमीन पर बोरा बिछा कर पढ़ रहे इन इन बच्चों के हौसले के आगे बड़े-बड़े हाइटेक स्कूल की आधुनिक व्यवस्था भी बौनी सी लगती है. आज अगर सरकार की योजनाएं इस बस्ती में सरलता से पहुंचे तो यहां के बच्चे भी समाज के लिए उदाहरण बन सकते हैं.
मेरे वार्ड में स्थित इस स्लम बस्ती के ठीक पीछे पहले एक प्राथमिक विद्यालय चलता था पर जगह के अभाव में वह बंद हो गया. हालांकि मैंने मुहल्ले में स्कूल के लिए नगर परिषद में प्रस्ताव रखा था पर इस दिशा में कोई खास पहल नहीं होने से स्कूल का निर्माण नहीं हो सका.
अंजू देवी, वार्ड पार्षद
समाज के हर वर्ग को शिक्षा से जोड़ना हमारा दायित्व है. इसके लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं. जिन जगहों पर विद्यालय का अभाव है वहां स्थानीय जन प्रतिनिधियों से बात कर व्यवस्थित स्कूल का संचालन कराया जायेगा.
अजीत कुमार सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी
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