जहां लगती थी महफिलें, अब धुंधली हो गयी उस रंगमंच की तसवीर

दिघवारा : रंगमंच से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार होता है. कलाकार अपने अभिनयों से समाज में मौजूद बुराईयों को दिखा कर आम जनमानस के अंदर सामाजिक चेतना पैदा करते हैं. अंधविश्वास की जकड़न से समाज को मुक्त कराने में भी रंगमंच और इससे जुड़े कलाकारों की अहम भूमिका होती है,मगर जब रंगमंचों की स्थिति खराब […]
दिघवारा : रंगमंच से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार होता है. कलाकार अपने अभिनयों से समाज में मौजूद बुराईयों को दिखा कर आम जनमानस के अंदर सामाजिक चेतना पैदा करते हैं. अंधविश्वास की जकड़न से समाज को मुक्त कराने में भी रंगमंच और इससे जुड़े कलाकारों की अहम भूमिका होती है,मगर जब रंगमंचों की स्थिति खराब हो और कलाकार गुमनामी में जाकर आर्थिक विपन्नता के बीच दूसरे पेशे को अपना लें, तो सवाल उठता है कि आखिर समाज को कुरीतियों से मुक्ति दिलाने का माध्यम कौन बनेगा.अब यहां स्थित रंगमंच बदहाली के कगार पर हैं. प्रखंड के सभी पंचायतों के अलावा नगर में अवस्थित रंगमंच बदहाल है.
कलाकारों को पूछने वाला कोई नहीं है.आर्यमंडल क्लब की शक्ल सब्जी आढ़त जैसी हो गयी है. 1885 से शुरू हुआ रंगमंच का इतिहास : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के वर्ष यानि 1885 में दिघवारा में रंगमंच की स्थापना हुई. ब्रिटिशकालीन समय में स्थापित डाइमेटिक क्लब ऐतिहासिक व धार्मिक नाटकों को प्रस्तुत करने के लिए प्रसिद्ध था.फिर आर्य मंडल क्लब व कला निकेतन की स्थापना हुई, जिसके कलाकारों ने नाटकों के माध्यम से लोगों के बीच क्रांतिकारी विचारों को परोस कर हर किसी के अंदर राष्ट्र प्रेम की भावना को बढ़ाया था.
ऐसे तो रंगमंच के जुड़े सैकड़ों कलाकारों ने अपने अभिनय क्षमता के सहारे देश भर में प्रसिद्धि पायी,मगर मियां हाशिम के हास्य अभिनय का जोड़ नहीं था. ‘बिहार चैंपियन’ का खिताब पाने वाले हाशिम जब अपनी एक्टिंग शुरू करते थे तो दर्शक हंसते हंसते लोट पोट हो जाते थे. लगभग चार दशक पूर्व दिघवारा में नाटक अपने चरम पर था.व्यापारिक केंद्र होने के नाते यहां के गोला मालिकों की अच्छी आमदनी थी एवं वे लोग ही नाटकों का खर्च उठाते थे. यहां के कलाकार आर्डर पर देश के विभिन्न जगहों के अलावा नेपाल तक जाकर अपनी प्रतिभा का डंका बजाते थे. दर्शकों की डिमांड के कारण कलाकारों की कलाकारी में जीवंतता लाने के लिए ओडिशा से ड्रेसमैन व कोलकाता से मेकअप मैन मंगवाया जाता था.
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