नाकाम हाथों की अंकिता पैरों से खींच रही किस्मत की लकीर

Published at :05 Mar 2017 1:14 AM (IST)
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नाकाम हाथों की अंकिता पैरों से खींच रही किस्मत की लकीर

छपरा(नगर) : संकल्प, विश्वास, धैर्य और उत्साह यदि किसी व्यक्ति में एक साथ समाहित हो जाए तो कठिन से कठिन मंजिल को पाना भी आसान हो जाता है, पर इन सब सद्गुणों के बाद भी अगर ईश्वर उस इनसान के शारीरिक क्षमता पर चोट कर दे तो आसान लक्ष्य भी कठिन लगने लगता है. हालांकि […]

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छपरा(नगर) : संकल्प, विश्वास, धैर्य और उत्साह यदि किसी व्यक्ति में एक साथ समाहित हो जाए तो कठिन से कठिन मंजिल को पाना भी आसान हो जाता है, पर इन सब सद्गुणों के बाद भी अगर ईश्वर उस इनसान के शारीरिक क्षमता पर चोट कर दे तो आसान लक्ष्य भी कठिन लगने लगता है. हालांकि इस सब के बावजूद कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी दृढ इच्छा शक्ति को आधार बनाकर कुछ ऐसा कर गुजरते हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है.

छपरा जिले के बनियापुर प्रखंड स्थित हरपुर बाजार के अशोक कुमार की 16 वर्षिया पुत्री अंकिता भी अपने मजबूत इरादों के बल पर समाज में एक आदर्श प्रस्तुत कर रही है.

शहर के गांधी उच्च विद्यालय में मैट्रिक की परीक्षा दे रही अंकिता के दोनों हाथ पोलियो ग्रस्त हैं. नाकाम हाथों का अभिशाप लिए अंकिता अपने दोनों पैरों से ही लिखकर परीक्षा दे रही है. पैर से लिखने के बावजूद अंकिता की लिखावट देखकर अच्छे-अच्छे अपने दांतों तले अंगुलियां दबा ले रहे हैं. जमीन पर बैठ कर पूरा एग्जाम बिल्कुल शान्तचित होकर दे रही अंकिता के बारे में परीक्षा केंद्र के वीक्षकों तथा उसके सहपाठियों ने बताया कि परीक्षा के 3 घंटो के दौरान उसके चेहरे का सहज भाव उसके मेधावी होने को परिलक्षित करता है. अंकिता एक बार जब लिखना शुरू करती है तो उसके पैर रुकने का नाम ही नही लेते.
हालांकि अंकिता के सिर्फ हाथ ही नहीं बल्कि भगवान ने उसके कंठ से आवाज भी बचपन में ही छीन ली थी. परिवार वाले और उसके चाचा श्याम कुमार प्रसाद के तमाम कोशिशों के बाद भी अंकिता का इलाज संभव न हो सका. सब लोग हार गये पर इस होनहार बच्ची के हौसलों ने दम नहीं तोड़ा. अंकित का संघर्ष बचपन से ही जारी रहा और उसने कठिन अभ्यास के बाद अपने पैरों को ही लेखनी का आधार बना डाला.
अंकिता अपने हाथों पर तो मेहंदी नहीं सजा सकती पर दूसरे के हाथों पर अपने पैरों से ही मेहंदी लगाना भी ये बखूबी जानती है. अगर एक बार इस लड़की को कोई लिखता हुआ देख ले तो उसके चेहरे पर सम्मान और प्रसन्नता का भाव स्पष्ट रूप से झलकने लगता है. वैसे तो मैट्रिक की परीक्षा शुरू हुए 4 दिन हो गये, पर अबतक परीक्षा केंद्र पर अंकिता का हौसला बढ़ाने कोई भी आलाधिकारी नही पहुंचा है. निरीक्षण के लिए तो कई बार दंडाधिकारी पहुंचे पर किसी ने अंकिता के माथे पर हाथ रखकर अपना आशीर्वाद भी देना जरूरी नहीं समझा. हरपुर बाजार के उमा देवी प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय की इस प्रतिभावान छात्रा को न तो अबतक कोई सरकारी सहयोग प्राप्त हो सका है और न ही इसे कोई उचित मार्गदर्शन प्राप्त हो सका है. जीवन में संघर्षशील अंकिता आज समाज के सभी वर्ग के लोगों खासकर लड़कियों के लिए एक शानदार मिसाल कायम कर रही है.
कंठ में नहीं है आवाज पर मन से निकलती है विश्वास की ध्वनि
गांधी उच्च विद्यालय में पैर से लिखकर परीक्षा दे रही है हरपुर की अंकिता
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