आत्मा व परमात्मा का प्रेम ही रासलीला
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Dec 2016 8:04 AM (IST)
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दिघवारा : भगवान निःस्वार्थ भाव वाले हर भक्त की भक्ति को स्वीकार करते हैं और ईश्वर का सानिध्य पाने के लिए हर किसी को अपने अंदर गोपियों जैसा भाव रखना चाहिए तभी ईश्वर प्रेम को हासिल किया जा सकेगा.उपरोक्त बातें नगर पंचायत के मालगोदाम के सामने गीता जयंती समारोह समिति द्वारा आयोजित हो रहे गीता […]
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दिघवारा : भगवान निःस्वार्थ भाव वाले हर भक्त की भक्ति को स्वीकार करते हैं और ईश्वर का सानिध्य पाने के लिए हर किसी को अपने अंदर गोपियों जैसा भाव रखना चाहिए तभी ईश्वर प्रेम को हासिल किया जा सकेगा.उपरोक्त बातें नगर पंचायत के मालगोदाम के सामने गीता जयंती समारोह समिति द्वारा आयोजित हो रहे गीता जयंती साप्ताहिक समारोह के छठे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश के प्रवचनकर्ता प्रकाश चैतन्य ने कही.
प्रत्येक इन्द्रियों से कृष्ण रस का पान करने वाली गोपियों का प्यार संसार में अद्वितीय है और आत्मा व परमात्मा का प्यार ही रासलीला है. चैतन्यजी ने कहा कि कलयुग में लोगों के बीच रासलीला को लेकर गलत धारणा है. उन्होंने कहा कि जिस उम्र में कृष्ण ने रासलीला किया था ,उस समय उनकी अवस्था आठ साल की थी, भला इस उम्र में कामुक भावना कैसे संभव थी?
आचार्य जी ने कहा कि गोपियां जीव आत्माएं हैं जिनकी भक्ति व प्रेम देख कर परमात्मा प्रकट होते हैं. उन्होंने कहा कि जब ह्रदय में गोपियों जैसा प्यार रहता है तभी ईश्वर भक्ति नसीब हो पाती है.
प्रवचन के दरम्यान चैतन्य जी ने सुन राधिका दुलारी, मैं हूं द्वारिका भिखारी भजन गाकर हर किसी को कृष्ण भक्ति रस में सराबोर कर दिया. इसके अलावे रास रचियों राधा के संग,रास रसियो व एक दिन वो भोले भंडारी बनकर नारी,वृन्दावन आ गए हैं आदि कई भजनों पर लोग झूमते नजर आये. वहीं खलीलाबाद के स्वामी वैराज्ञानंद परमहंस ने कहा कि आत्मा के मंदिर में परमात्मा का निवास होता है और आत्मा ही मानव शरीर की सबसे सुंदर वस्तु है.
उन्होंने कहा कि जब तक इनसान मोह व अन्य मानवीय विकारों से मुक्त नहीं होगा तब तक वह ईश्वर भक्ति पाने से महरूम रहेगा. ज्ञान के महत्व की चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि ज्ञान की परिपक्वता से व्यक्ति के व्यवहार में सरलता आती है और भक्ति के बिगड़ने से आशक्ति आती है.
छठे दिन के प्रवचन में थानाध्यक्ष सतीश कुमार,आरजेएस सचिव अशोक कुमार सिंह,प्रो कन्हैया सिंह,सुरेंद्र प्रसाद,मोहन शंकर प्रसाद,राधेश्याम प्रसाद,सीताराम प्रसाद,शिक्षक अरुण कुमार,सुनील स्वर्णकार,अधिवक्ता मुनिलाल, एन.के.संतोष, राजीव रंजन शरण, महाराज शरण, प्रो सुनील सिंह, बिजली सिंह, सुनील कुमार, सूर्यनारायण प्रसाद, महेश स्वर्णकार, गजेंद्र उपाध्याय सरीखे सैकड़ों लोग ज्ञान गंगा में डुबकी लगाते दिखे.
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