मेडिकल कॉलेज का डीपीआर भेजा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Nov 2016 5:01 AM (IST)
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पहल . आपातकालीन मरीजों को बेहतर उपचार के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर छपरा (सारण) : छपरा मेडिकल कॉलेज खोलने का रास्ता साफ हो गया है. इसके लिए डीपीआर बनाकर सरकार को भेज दिया गया है. मेडिकल कॉलेज छपरा में खुलने से यहां के मरीजों को बेहतर उपचार के लिए लंबी दूरी नहीं तय करना […]
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पहल . आपातकालीन मरीजों को बेहतर उपचार के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर
छपरा (सारण) : छपरा मेडिकल कॉलेज खोलने का रास्ता साफ हो गया है. इसके लिए डीपीआर बनाकर सरकार को भेज दिया गया है. मेडिकल कॉलेज छपरा में खुलने से यहां के मरीजों को बेहतर उपचार के लिए लंबी दूरी नहीं तय करना पड़ेगा और समय पर सस्ता उपचार की सुविधा मरीजों को नसीब हो सकेगा. मेडिकल कॉलेज खोलने का मामला पिछले करीब तीन वर्षों से अधर में लटका हुआ था. पिछले वर्ष यहां सदर अस्पताल परिसर में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
लेकिन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सदर अस्पताल में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की अनुमति नहीं दी. इसके पश्चात मेडिकल कॉलेज के लिए 25 एकड़ भूमि का अधिग्रहण आनन-फानन में किया गया और डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजा गया है. अब इसके लिए भवन निर्माण हेतु राशि आवंटित किये जाने की प्रतीक्षा की जा रही है. जयप्रकाश विश्वविद्यालय परिसर में इसके लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है.
13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत मिली स्वीकृति : छपरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल निर्माण की योजना को सरकार ने 13वीं पंच वर्षीय योजना में शामिल किया है. भूमि अधिग्रहण और डीपीआर तैयार होने के साथ अगले एक वर्ष मेडिकल कॉलेज को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. शुरुआती दौर में यहां मेडिकल कॉलेज शुरू होगा. दूसरे चरण में ओपीडी और अगले चरण में आपातकालीन सेवा समेत अन्य विभागों को प्रारंभ किया जायेगा. वर्तमान समय में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल मुजफ्फरपुर के प्राचार्य को छपरा मेडिकल कॉलेज का प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है. इस कार्य की मॉनिटरिंग की जिम्मेवारी सिविल सर्जन डॉ निर्मल कुमार को दी गयी है.
चिकित्सा सुविधा सहज व सुलभ हो सकेगा
छपरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चालू हो जाने से सारण प्रमंडल के लोगों को उच्च स्तरीय चिकित्सा की सुविधा सहज व सुलभ हो सकेगा. इसके लिए उन्हें लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. अभी यहां के मरीजों को पटना, मुजफ्फरपुर, गोरखपुर और वाराणसी का चक्कर लगाना पड़ता है. छपरा से पटना की दूरी करीब एक सौ कीलोमीटर है. वहीं मुजफ्फरपुर करीब 125 किलोमीटर की दूरी पर है. जबकि गोरखपुर तथा वाराणसी की दूरी 200 किलोमीटर से अधिक है. लंबी दूरी तय करने की वजह से आपातकालीन मरीजों को असमय ही काल कवलित होना पड़ता है. खासकर छपरा से पटना ले जाने के दौरान चार स्थानों पर रेलवे क्रासिंग से होकर गुजरना पड़ता है. साथ ही जाम के कारण छपरा से पटना पहुंचने में एम्बुलेंस को भी चार-पांच घंटे लग जाता है. इस वजह से आपातकालीन मरीजों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सदर अस्पताल तक आपातकालीन मरीजों का प्राथमिक उपचार ही हो पाता है. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सीधे पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है. ऐसी परिस्थिति में आने वाले समय में आपातकालीन मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूर नहीं ले जाना पड़ेगा. साथ ही मेडिकल कॉलेज खुल जाने से सामान्य मरीजों को भी उच्च स्तरीय उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगा.
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है
छपरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल चालू करने की प्रक्रिया काफी तेजी के साथ चल रही है. डीपीआर तैयार कर सरकार को भेज दिया गया है. इसके लिए भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है. जयप्रकाश विश्वविद्यालय परिसर में अधिग्रहण की गयी भूमि पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनेगा. यह इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
डॉ निर्मल कुमार, सिविल सर्जन, सारण
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