ट्रैक को बनाया जायेगा आधुनिक जाजायेइलेक्ट्रॉनिक फेसिंग

Published at :02 Oct 2016 3:08 AM (IST)
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ट्रैक को बनाया जायेगा आधुनिक   जाजायेइलेक्ट्रॉनिक फेसिंग

पहल. दुर्घटना पर लगेगी लगाम, ट्रैक पर इलेक्ट्रॉनिक फेसिंग लगाने की तैयारी ॉपर लगेगा लगाम छपरा (सारण) : पूवोत्तर रेलवे अब रेलवे ट्रैक पर होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनायेगा. इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य योजना बनायी जा रही है. रेलवे ट्रैक […]

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पहल. दुर्घटना पर लगेगी लगाम, ट्रैक पर इलेक्ट्रॉनिक फेसिंग लगाने की तैयारी

ॉपर लगेगा लगाम
छपरा (सारण) : पूवोत्तर रेलवे अब रेलवे ट्रैक पर होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनायेगा. इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य योजना बनायी जा रही है. रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों को दुर्घटनाग्रस्त करने का प्रयास करने वाले अब सुरक्षाबलों की नजर से बच नहीं पायेंगे. इनसे बचने के लिए रेलवे की ओर से सेना की तर्ज पर इलेक्ट्रॉनिक फेसिंग लगाने की तैयारी कर रहा है. पूर्वोत्तर रेलवे में इसका प्रयोग हो रहा है.
यह जानकारी रेलवे अधिकारियों ने दी. इसके लिए रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव मांगा है. लगातार ट्रैक पर मिलने वाले स्लीपर, पटरियों के नट खोलने की घटनाएं होती हैं. कहीं पटरी उखाड़ी जाती है तो, कहीं वायर काटा जाता है. इन घटनाओं को अंजाम देने वाले अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो जाते हैं. सेना में इस यंत्र का इस्तेमाल होता है. बॉर्डर पर अंधेरे में कोई भी व्यक्ति आता है तो, उसकी आवाज सुनाई दे जाती है. रेलवे ऐसा ही प्रयोग कर रहा है. रात दो बजे कोई ट्रैक के करीब क्यों आया. आयेगा तो, कंट्रोल में इसकी सूचना होगी और उसे तत्काल पकड़ा जा सकेगा. ट्रैक के दोनों ओर दीवार बनायी जायेगी. जिससे भी ट्रैक के करीब लोगों का आना बंद हो जायेगा.
ट्रैफिक बेस है पूर्वोत्तर रेलवे : पूर्वोत्तर रेलवे यात्री प्रधान रेलवे है. पूर्वोत्तर रेलवे जोन में मुख्य रूप से यात्री ट्रेनों की प्रधानता है. इस वजह से ट्रेनों की सुरक्षा के साथ यात्रियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान सबसे पहले यहीं से की जा रही है. उत्तर बिहार के कई इलाकों में पूर्वोत्तर रेलवे के रेलवे ट्रैक है. जो नक्सल प्रभावित इलाका में शामिल है. रेलवे ट्रैक पर होने वाली घटनाओं के कारण रेलवे को न केवल आर्थिक क्षति होती है बल्कि जानमाल की भी हानि होती है. इसको रेलवे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. सुरक्षा कर्मियों, गैंग मैन, ट्रैक मैन की कमी के कारण होने वाली परेशानी भी इससे दूर हो जायेगी. रेलवे पुल, पुलिया भी सुरक्षित हो जायेंगे.
क्या है मामला
नक्सली वारदातों के कारण ट्रेनों का परिचालन बाधित होने और रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं के मद्देनजर रेलवे प्रशासन ने यह कदम उठाया है. संरक्षा की दृष्टिकोण से यात्रियों को सुरक्षित यात्रा सुलभ कराने के लिए आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा. इससे ट्रैक पर होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा बल और ट्रैक मैन को ड्यूटी नहीं बजानी पड़ेगी. बताते चले कि छपरा-सोनपुर रेलखंड पर पिछले एक दशक के अंदर दो बड़ी घटनाएं हुई है. दो वर्ष पहले 25 जून 2014 को राजधानी एक्सप्रेस दुर्घटना की शिकार हो गयी थी.
जबकि अवध असम एक्सप्रेस को पटरी समेत उड़ाने की कोशिश सात वर्ष पहले बड़ा गोपाल स्टेशन के समीप नक्सलियों ने की थी. इसी तरह छपरा-थावे रेलखंड पर पटेढ़ी स्टेशन के चार वर्ष पहले नक्सलियों ने केन बम लगाकर पटरी उड़ाने का प्रयास किया था.
क्या कहते हैं अधिकारी
संरक्षा की दृष्टिकोण से रेल पटरी पर सेना की तर्ज पर इलेक्ट्रॉनिक फेसिंग लगाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड ने मांगा है. इसके लिए सर्वेक्षण का कार्य कराया जा रहा है. महत्वपूर्ण रेलखंडों पर सबसे पहले यह लगाया जायेगा. इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है.
अशोक कुमार, रेलवे जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे
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