रात में दिखेगा दिन जैसा नजारा

Published at :02 Jul 2016 7:09 AM (IST)
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रात में दिखेगा दिन जैसा नजारा

कवायद. अब दूर से ही चमकेगा छपरा जंकशन, नहीं बुझेगी बोगियों की लाइट विजयवाड़ा स्टेशन के तर्ज पर जल्द ही छपरा जंकशन भी एक किलोमीटर दूर से रोशनी से नहाया दिखाई देगा. करीब 50 लाख रुपये की लागत से यह काम किया जायेगा. रेलवे प्रशासन ने इस योजना को मंजूरी दे दी है. छपरा (सारण) […]

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कवायद. अब दूर से ही चमकेगा छपरा जंकशन, नहीं बुझेगी बोगियों की लाइट
विजयवाड़ा स्टेशन के तर्ज पर जल्द ही छपरा जंकशन भी एक किलोमीटर दूर से रोशनी से नहाया दिखाई देगा. करीब 50 लाख रुपये की लागत से यह काम किया जायेगा. रेलवे प्रशासन ने इस योजना को मंजूरी दे दी है.
छपरा (सारण) : पूर्वोतर रेलवे का छपरा जंकशन अब दूर से ही चमकता हुआ दिखेगा. नहीं बुझेगी बोगियों की लाइट. स्टेशन से एक किलोमीटर दूर ट्रेन पहुंचने पर ही स्टेशन रोशनी से जगमगा उठेगा. स्टेशन की खूबसूरती बढ़ाने की कवायद तेज हो गयी है.
विजयवाड़ा स्टेशन के तर्ज पर जल्द ही छपरा जंकशन भी एक किलोमीटर दूर से रोशनी से नहाया दिखाई देगा. इसके लिए फ्लड एलइडी लाइट का इस्तेमाल होगा. करीब 50 लाख रुपये की लागत से यह काम किया जायेगा. रेलवे प्रशासन ने इस योजना को मंजूरी दे दी है. यह स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल का एकलौता स्टेशन हो,गा जहां इस तरह की कार्य योजना को लागू किया जा रहा है. दरअसल सारण जिले को रेलवे द्वारा औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत दरियापुर में रेल चक्का कारखाना को चालू कर दिया गया है और मढ़ौरा में डीजल रेल कारखाने के निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है. उत्तर बिहार का यह एकमात्र जिला है, जहां एक दशक के अंदर दो बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हुई है और सबसे अहम बात यह है कि रेलवे के द्वारा इसकी स्थापना की गयी है. यात्रियों को इस क्षेत्र के महत्व से अवगत कराने की दृष्टि से रेलवे ने यह सार्थक पहल शुरू की है.
क्या है स्थिति: वर्तमान समय में छपरा जंकशन पर रोशनी का सामान्य प्रबंध है. यह स्टेशन ए-वन क्लास का है, जिसके अनुरूप प्रकाश की व्यवस्था नहीं की गयी है. हालांकि वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल महाप्रबंधक सुखवीर सिंह के द्वारा स्टेशन पर अतिरिक्त रोशनी का प्रबंध करने का निर्देश दिया गया था, जिसका अनुपालन नहीं हो सका.
क्या है उद्देश्य : फ्लड एलइडी लाइट लगाने से ऊर्जा की खपत कम होगी. बिजली बिल पर खर्च होनेवाली राशि में कमी आयेगी. कम ऊर्जा से अधिक रोशनी मिलेगी. स्टेशन के रोशन होने से यात्रियों को सुविधा होगी. रात के समय उचक्कों तथा अपराधियों पर नजर रखने में सहूलियत होगी. यात्रियों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी. सोलर लाइट लगाये जाने से प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा. जेनेरेटर तथा बिजली पर निर्भरता कम होगी.
ट्रेनों में भी नहीं होगी रोशनी की किल्लत : चमकते स्टेशन की प्रमुख ट्रेनों में भी रोशनी की किल्लत नहीं होगी. सभी प्रमुख ट्रेनों में सीएफएल की जगह एलइडी लाइट लगायी जायेंगी. बैटरी खराब होने पर भी दूसरे पैनल के जरिए लाइटें जलती रहेंगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. इस योजना के लिए करीब 70 लाख रुपये राशि का आवंटन हुआ है.
क्या कहते हैं अधिकारी
तीन बड़े काम कराये जाने हैं. तीनों एक साल के अंदर पूरे हो जायेंगे. लगभग सभी कार्यों की मंजूरी मिल चुकी है. जल्द ही काम शुरू करा दिया जायेगा.
अशोक कुमार, रेलवे जनसंपर्क अधिकारी,पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल
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