छपरा (सारण) : …और तरबूज का व्यवसायी बन कर पहुंची पुलिस ने छह नक्सलियों को दबोच लिया. करीब छह माह से नक्सलियों को पकड़ने के लिए पुलिस तथा एसटीएफ के पदाधिकारी गंडक के दियारा में रेकी कर रहे थे. नक्सलियों को पकड़ने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी.
पिकअप वैन लेकर व्यवसायी के रूप में पहुंची पुलिस तरबूज की कीमत को लेकर काफी देर तक मोल-भाव करती रही और इसी दौरान बाढ़ीचक गांव के कुख्यात नक्सली अमीन सहनी के भाई तथा नक्सली अनिल सहनी व अन्य को पकड़ा गया. पकड़े गये नक्सलियों द्वारा जमीन में गाड़ कर रखी गयी एक कारबाइन, चार रायफल तथा तीन कुकर बम, नक्सली साहित्य, पोस्टर, परचा, मोबाइल आदि भी मिले हैं.
टीम का किया गया था गठन : लेवी मांगे जाने की घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम का गठन किया था, जिसमें मढ़ौरा एसडीपीओ अशोक कुमार सिंह, एसटीएफ अभियान के एएसपी राजेश कुमार, मकेर थानाध्यक्ष संजय कुमार गुप्ता, परसा थानाध्यक्ष राजरूप राय समेत कई अन्य पुलिस पदाधिकारी लगाये गये थे. सहायक पुलिस अधीक्षक मनीष इसकी मॉनीटरिंग कर रहे थे. पूरी कार्रवाई एसपी पंकज कुमार राज की देख-रेख में चल रही थी.
पुलिस व एसटीएफ छह माह से कर रही थी रेकी
क्या है मामला
गंडक के किनारे सारण तटबंध पर सड़क का निर्माण करा रही कंपनी से नक्सलियों ने लेवी की मांग की थी. इसकी प्राथमिकी कंपनी के निदेशक विशाल कुमार ने दर्ज करायी थी. लेवी नहीं मिलने पर नक्सलियों ने निर्माण कंपनी के बेस कैंप तथा वाहनों को उड़ाने की धमकी दी थी. साथ ही कंपनी के निदेशक को जान से मारने की धमकी दी थी. नक्सलियों द्वारा लेवी मांगे जाने के बाद निर्माण कंपनी के बेस कैंप, कार्य स्थल की सुरक्षा बढ़ा दी गयी थी. दिन में ही कार्य होता था और रात में सभी वाहनों को थाना परिसर लाकर रखा जाता था. निर्माण कार्य में लगे मजदूर व कर्मी डरे सहमे थे.
मामला लेवी मांगने के आरोप में छह नक्सलियों की गिरफ्तार करने का
एक कारबाइन, चार रायफल व तीन कुकर बम भी बरामद
नक्सली साहित्य, पोस्टर, परचा, मोबाइल आदि भी मिले
लेवी नहीं देने पर किया था बम ब्लास्ट
चार माह पहले एक जनवरी, 2016 की रात में नक्सलियों ने छपरा-आरा के बीच गंगा नदी पर पुल का निर्माण करा रही कंपनी के बेस कैंप पर बम ब्लास्ट किया था. इस दौरान नक्सलियों ने निर्माणाधीन पुल को भी उड़ाने का प्रयास किया था. इस मामले में भी अमीन सहनी का नाम आया था. पुलिस ने नक्सलियों को तीन दिनों के अंदर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अमीन सहनी के खिलाफ लेवी मांगने के कई मामले लंबित हैं. अमीन के साथ उसका भाई अनिल सहनी भी गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय है.
कंपनी की बढ़ा दी गयी थी सुरक्षा
विधानसभा चुनाव के पहले से ही पूरे क्षेत्र में पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गयी थी. एसटीएफ के द्वारा लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रहा था. एसएसबी तथा सीआरपीएफ के द्वारा समय-समय पर फ्लैग मार्च किया जा रहा था. पंचायत चुनाव को लेकर नक्सली अमित सहनी का भाई अनिल सहनी पहुंचा था. इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई तेज की. इसी क्रम में यह सफलता मिली है.
मिले कई महत्वपूर्ण सुराग : गिरफ्तार नक्सलियों से पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं. नक्सलियों से मिले सुराग के आधार पर जांच- पड़ताल की जा रही है और संभावित ठिकानों पर पुलिस छापेमारी कर रही है. पकड़े गये नक्सलियों के खिलाफ मुजफ्फरपुर में भी कई मामले लंबित हैं. सड़क निर्माण कंपनी से लेवी मांगने के मामले में वांछित कई अन्य नक्सलियों की तलाश की जा रही है.
पुरस्कृत किये जायेंगे पुलिसकर्मी : पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार राज ने बताया कि लेवी मांगने के मामले में वांटेड नक्सलियों को पकड़ने में उत्कृष्ट योगदान करने वाले सभी पुलिस पदाधिकारियों को पुरस्कृत किया जायेगा. सभी पुलिसकर्मियों को नकद राशि व प्रशस्तिपत्र दिया जायेगा. उन्होंने इसे कारण पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.
नक्सलियों को लगा करारा झटका : पुलिस तथा एसटीएफ के द्वारा छह नक्सलियों की अवैध हथियार के साथ की गयी गिरफ्तारी से नक्सलियों को करारा झटका लगा है और पुलिस ने राहत की सांस ली है. इन नक्सलियों ने सारण तथा मुजफ्फरपुर की निर्माण कंपनियों की सिररर्द बढ़ा दिया था.
लेवी मांगने के कारण विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था.