तीन दिन लड़के, तो तीन दिन लड़कियों की होती है पढ़ाई

Published at :07 Apr 2016 7:50 PM (IST)
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तीन दिन लड़के, तो तीन दिन लड़कियों की होती है पढ़ाई

तीन दिन लड़के, तो तीन दिन लड़कियों की होती है पढ़ाई ऑड इवन के तहत होती है पढ़ाई क्लास रूम की कमी से जूझ रहा है खोभारी साह उच्च विद्यालयफोटो – 7 सीएचपी 000- विद्यालय परिसर.इरंट्रो- जगह की कमी से पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही है. प्रखंड के खोभारी साह उच्च विद्यालय इसुआपुर में […]

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तीन दिन लड़के, तो तीन दिन लड़कियों की होती है पढ़ाई ऑड इवन के तहत होती है पढ़ाई क्लास रूम की कमी से जूझ रहा है खोभारी साह उच्च विद्यालयफोटो – 7 सीएचपी 000- विद्यालय परिसर.इरंट्रो- जगह की कमी से पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही है. प्रखंड के खोभारी साह उच्च विद्यालय इसुआपुर में छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए विद्यालय प्रशासन द्वारा ऑड इवन के तहत पढ़ाई की व्यवस्था की गयी है. बावजूद संख्या के हिसाब से यह व्यवस्था भी ना काफी साबित हो रही है. संवाददाता4इसुआपुरइस उच्च विद्यालय में 1059 छात्र- छात्राएं पढ़ते हैं, जिसमे 789 छात्र तथा 270 छात्राएं हैं . तीन क्लास रूम वाले इस विद्यालय में 300 छात्रों को किसी तरह बैठाया जाता है, लेकिन प्रतिदिन 500 से 600 छात्र-छात्राओं के आने से विद्यालय में भगदर की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसकी वजह से 2013 में तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक अरुण कुमार सिंह ने एक दिन छात्र तथा दूसरे दिन छात्राओं को पढ़ाने का आदेश निर्गत किया था. इस व्यवस्था के तहत सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को छात्रों तथा मंगलवार, गुरुवार तथा शनिवार को छात्राओं को पढ़ाने का निर्णय हुआ था. यह व्यवस्था आज भी कायम है. क्या कहते हैं छात्र-छात्राएं छात्र नवीन रजक, रोहित कुमार, आनंद कुमार पांडेय, गोविंद कुमार राय तथा छात्रा सुमन कुमारी, आरती कुमारी, पूनम कुमारी, रश्मि कुमारी (सभी क्लास नौ ) का कहना है कि सप्ताह में मात्र तीन दिनों की पढ़ाई से हमारा भविष्य अंधकारमय हो गया है. सिलेबस पूरा नहीं हो पाता है. विषय वार शिक्षक नहीं हैं , बिजली नहीं होने के कारण गरमी में बहुत परेशानी होती हैं. चापाकल का अभाव है , पुस्तकालय नहीं है , शौचालय नहीं है, जिसकी वजह से भी परेशानी है. विद्यालय में कंप्यूटर तो है, लेकिन कंप्यूटर रूम तथा कंप्यूटर शिक्षक नहीं है. खेल का मैदान भी नहीं है.क्या कहते हैं प्रभारी प्रधानाध्यापक विद्यालय में 10 शिक्षक हैं, लेकिन हिंदी,अंगरेजी तथा विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं. मात्र तीन क्लास रूम हैं, जिनमे बेंच का अभाव है, जिसकी वजह से ऑड इवन के तहत एक दिन छात्र तथा दूसरे दिन छात्राओं को पढ़ाया जाता है. इस वजह से बच्चों का सिलेबस पूरा नहीं हो पता है. यह बहुत चिंतनीय विषय है. धर्मेंद्र कुमार, प्रभारी प्रधानाध्यापक क्या कहते है संस्थापक सदस्य 1977 में पठन-पाठन का शुभारंभ हुआ. लेकिन तब से आज तक इस विद्यालय की सरकार द्वारा अनदेखी की गयी. लगभग एक हजार से ज्यादा छात्र प्रतिवर्ष इस विद्यालय में पढ़ते हैं. जिनसे विकास शुल्क वसूला जाता है. लेकिन विकास के नाम पर कुछ भी नहीं होता है. जन प्रतिनिधियों द्वारा भी विद्यालय की अनदेखा की गयी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. अमरनाथ प्रसाद क्या कहते है विधायक यह व्यवस्था बच्चों के भविष्य के साथ खेलवाड़ है, जिसे कतई बरदास्त नहीं किया जा सकता. मैंने अपने क्षेत्र में शिक्षा की बदहाली को गंभीरता से लिया है. मैं इस मुद्दे पर विभागीय पधाधिकरियों से बात करूंगा. मैं चाहूंगा कि इस विद्यालय में भवन निर्माण तथा शिक्षकों की समुचित व्यवस्था हो. विद्यालय में बिजली,पानी तथा शौचालय की व्यवस्था पर भी मेरा ध्यान रहेगा. जिला शिक्षा पदाधिकारी भवन निर्माण हेतु अविलंब पहल करें. मुंद्रिका प्रसाद राय

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