जेपीविवि में परत-दर-परत खुल रहा है घोटाले का रहस्य

जेपीविवि में परत-दर-परत खुल रहा है घोटाले का रहस्य प्राथमिकी के बाद पूर्व कुलपति ने कर दिया डेढ़ करोड़ का भुगतानसंवाददाता, छपरा (सारण) उत्तरपुस्तिका घोटाले में चार्ज शीटेड जेपीविवि के कुलपति प्रो डीके गुप्ता की बर्खास्तगी के साथ कई अन्य घोटाले उजागर होने लगे हैं. विश्वविद्यालय में हुए घपले-घोटाले परत दर परत खुलकर सामने आने […]
जेपीविवि में परत-दर-परत खुल रहा है घोटाले का रहस्य प्राथमिकी के बाद पूर्व कुलपति ने कर दिया डेढ़ करोड़ का भुगतानसंवाददाता, छपरा (सारण) उत्तरपुस्तिका घोटाले में चार्ज शीटेड जेपीविवि के कुलपति प्रो डीके गुप्ता की बर्खास्तगी के साथ कई अन्य घोटाले उजागर होने लगे हैं. विश्वविद्यालय में हुए घपले-घोटाले परत दर परत खुलकर सामने आने लगे है, जिसमें संलिप्त विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों पर गाज गिरने की प्रबल संभावना है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरा द्वारा दर्ज उत्तर पुस्तिका घोटाले मामले में एक नया अध्याय जुड़ गया है. दर्ज मामले में पूर्व कुलपति व अन्य के खिलाफ एक करोड़ 44 लाख के घोटाले का आरोप है, लेकिन जांच के दौरान यह बात भी सामने आयी है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एक करोड़ 50 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया है. यह खुलासा चार दिनों पहले जांच करने आयी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने की. निगरानी टीम ने घंटों जांच की थी और संचिकाओं की छान-बीन की. इस दौरान कई पदाधिकारियों से निगरानी की टीम ने अलग-अलग पूछ ताछ भी की. सरकारी आवास में रह कर लिया भत्तापूर्व कुलपति प्रो गुप्ता के कारनामे का खुलासा राजभवन की तीन सदस्यीय जांच टीम ने की है. टीम ने जांच में यह पाया है कि प्रो. गुप्ता सरकारी आवास में रहते हुए आवास भत्ता उठा लिया है. यही नहीं गलत तरीके से टीए-डीए का भी भुगतान करा लिया है. राजभवन की टीम के द्वारा इसकी जांच कर ली गयी है. तीन सदस्यीय टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट राजभवन को नहीं सौंपा है. घोटाले की है लंबी सूची राजभवन तथा निगरानी द्वारा शुरू किये गये जांच में घोटाले की लंबी सूची सामने आयी है. हर रोज एक नये घोटाले का नाम इस सूची में जुड़ता जा रहा है. हाइकोर्ट के भी फर्जी बिल भुगतान का मामला सामने आया है. शनिवार को हाइकोर्ट में अवकाश रहता है और उस दिन भी हाइकोर्ट के नाम पर बिल का भुगतान किया गया है. पंजीयन घोटाले की जांच का गंभीर विषयविश्वविद्यालय में चल रहा पंजीयन घोटाला भी जांच का गंभीर विषय बन गया है. सत्र 2015-16 कुछ चुनिंदा कॉलेजों ने स्वीकृत सीट के दस गुणा छात्रों की पंजीयन राशि स्नातक प्रथम खंड के लिए विश्वविद्यालय में जमा कर दिया है लेकिन अब तक नामांकित छात्रों के पंजीयन फार्म जमा नहीं किया गया है. चुनिंदा कॉलेजों के द्वारा अब भी मोटी रकम लेकर सत्र 2015-16 में स्नातक प्रथम खंड में नामांकन किये जाने की चर्चा आम है. इस खेल में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों तथा कॉलेज कर्मियों की मिली भगत जगजाहिर है. बैक डेट में एडमिशन तथा पंजीयन के नाम पर छात्रों से मनमाना राशि की वसुली की जा रही है. परीक्षा विभाग की राशि से खरीदा वाहनकुलपति के लिए पहले से लग्जरी वाहन उपलब्ध रहने के बावजूद पूर्व कुलपति प्रो. गुप्ता ने 28 लाख 50 हजार की लागत से एक और फॉरचूनर वाहन खरीदा गया है. वही भी नियम को ताक पर रख कर. परीक्षा विभाग की राशि से वाहन का क्रय किया गया है जो न केवल राशि का अपव्यय है, बल्कि नियम का भी घोर उल्लंघन है. इसकी भी राजभवन के द्वारा देर सबेर जांच करायी जा सकती है.
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