महापौर प्रिया ने बचायी कुर्सी
Updated at : 05 Sep 2019 12:57 AM (IST)
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छपरा : छपरा नगर निगम की महापौर प्रिया सिंह के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से गिर गया. बुधवार को नगर निगम के सभागार में आयोजित अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुल 45 वार्ड पार्षदों में से 41 ने बैठक में शामिल होकर पंजी पर हस्ताक्षर किये. 35 पार्षदों ने प्रिया सिंह […]
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छपरा : छपरा नगर निगम की महापौर प्रिया सिंह के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से गिर गया. बुधवार को नगर निगम के सभागार में आयोजित अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुल 45 वार्ड पार्षदों में से 41 ने बैठक में शामिल होकर पंजी पर हस्ताक्षर किये. 35 पार्षदों ने प्रिया सिंह के पक्ष में मतदान किया.
वहीं छह पार्षदों, जिनमें छपरा नगर निगम की उपमहापौर अमितांजलि सोनी, छपरा नगर पर्षद के तत्कालीन उपाध्यक्ष रामाकांत सिंह डबलू, सुनीता देवी के अलावा नाजिया सुल्ताना शामिल हैं, ने बैठक का बहिष्कार किया. वहीं, मंडल कारा, छपरा में उत्पाद अधिनियम के तहत बंद विचाराधीन बंदी संजीव कुमार उर्फ भोदा निर्धारित समय से काफी देर से नगर निगम सभागार में पहुंचे.
उधर तीन अन्य वार्ड पार्षद बैठक से अनुपस्थित रहे. छपरा नगर निगम के नगर आयुक्त संजय कुमार उपाध्याय ने प्रिया सिंह को विजयी घोषित करते हुए प्रमाणपत्र दिया. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बहिष्कार करने वाली उपमहापौर व अन्य वार्ड पार्षदों ने कहा कि जिन वार्ड पार्षदों ने महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया था, उन्होंने ही उनके कुर्सी को बचाने के लिए साजिश रची, जो पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ-साथ आम जनता के साथ धोखा है. उन्होंने बताया कि महापौर के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया.
वहीं उपमहापौर के विरुद्ध छह सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी. इससे पूर्व नगर निगम परिसर में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सुबह से ही पार्षदों व उनके समर्थकों में चहलकदमी दिखी. वहीं प्रशासन के द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर सभागार के मुख्य द्वार पर तथा नगर निगम के मुख्य द्वार पर मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. महापौर को विश्वास मत हासिल करने के लिए 23 मतों की ही जरूरत थी.
सौदेबाजी का परिणाम है अविश्वास प्रस्ताव गिरना : छपरा नगर निगम की उपमहापौर अमितांजलि सोनी, पूर्व उपाध्यक्ष व वार्ड पार्षद रामाकांत सिंह उर्फ डब्लू ने अविश्वास प्रस्ताव में कई पार्षदों के आम जन की समस्याओं को नजरअंदाज कर व्यक्तिगत हित के लिए सौदेबाजी बताया.
इन दोनों ने कहा कि जिन पार्षदों ने मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था, उन्होंने ही अपनी गरिमा को नजरअंदाज कर अविश्वास प्रस्ताव को गिराने की साजिश रची. यह निश्चित तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए घातक है.
इनका कहना था कि वार्ड के विकास की अनदेखी कर वार्ड पार्षदों द्वारा जनता को कचरा, गंदगी को अंबार, सड़क पर बहते नालों का पानी तथा बढ़ते टैक्स का बोझ ही सौगात में दिया गया है. ऐसी स्थिति में हमारे पास अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक का बहिष्कार करने के अलावा कोई लोकतांत्रिक मार्ग नहीं दिखा.
विरोधी पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों के पासा बदलने को ले कसा तंज
छपरा : छपरा नगर निगम की महापौर प्रिया सिंह के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से गिर गया. बुधवार को नगर निगम के सभागार में आयोजित अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुल 45 वार्ड पार्षदों में से 41 ने बैठक में शामिल होकर पंजी पर हस्ताक्षर किये. 35 पार्षदों ने प्रिया सिंह के पक्ष में मतदान किया.
वहीं छह पार्षदों, जिनमें छपरा नगर निगम की उपमहापौर अमितांजलि सोनी, छपरा नगर पर्षद के तत्कालीन उपाध्यक्ष रामाकांत सिंह डबलू, सुनीता देवी के अलावा नाजिया सुल्ताना शामिल हैं, ने बैठक का बहिष्कार किया. वहीं, मंडल कारा, छपरा में उत्पाद अधिनियम के तहत बंद विचाराधीन बंदी संजीव कुमार उर्फ भोदा निर्धारित समय से काफी देर से नगर निगम सभागार में पहुंचे.
उधर तीन अन्य वार्ड पार्षद बैठक से अनुपस्थित रहे. छपरा नगर निगम के नगर आयुक्त संजय कुमार उपाध्याय ने प्रिया सिंह को विजयी घोषित करते हुए प्रमाणपत्र दिया. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बहिष्कार करने वाली उपमहापौर व अन्य वार्ड पार्षदों ने कहा कि जिन वार्ड पार्षदों ने महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया था, उन्होंने ही उनके कुर्सी को बचाने के लिए साजिश रची, जो पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ-साथ आम जनता के साथ धोखा है. उन्होंने बताया कि महापौर के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया. वहीं उपमहापौर के विरुद्ध छह सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी.
इससे पूर्व नगर निगम परिसर में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सुबह से ही पार्षदों व उनके समर्थकों में चहलकदमी दिखी. वहीं प्रशासन के द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर सभागार के मुख्य द्वार पर तथा नगर निगम के मुख्य द्वार पर मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. महापौर को विश्वास मत हासिल करने के लिए 23 मतों की ही जरूरत थी.
सौदेबाजी का परिणाम है अविश्वास प्रस्ताव गिरना : छपरा नगर निगम की उपमहापौर अमितांजलि सोनी, पूर्व उपाध्यक्ष व वार्ड पार्षद रामाकांत सिंह उर्फ डब्लू ने अविश्वास प्रस्ताव में कई पार्षदों के आम जन की समस्याओं को नजरअंदाज कर व्यक्तिगत हित के लिए सौदेबाजी बताया. इन दोनों ने कहा कि जिन पार्षदों ने मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था, उन्होंने ही अपनी गरिमा को नजरअंदाज कर अविश्वास प्रस्ताव को गिराने की साजिश रची. यह निश्चित तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए घातक है.
इनका कहना था कि वार्ड के विकास की अनदेखी कर वार्ड पार्षदों द्वारा जनता को कचरा, गंदगी को अंबार, सड़क पर बहते नालों का पानी तथा बढ़ते टैक्स का बोझ ही सौगात में दिया गया है. ऐसी स्थिति में हमारे पास अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक का बहिष्कार करने के अलावा कोई लोकतांत्रिक मार्ग नहीं दिखा.
अविश्वास प्रस्ताव पर नगर निगम परिसर में सुबह से ही रही गहमागहमी
छपरा (सदर) : छपरा नगर निगम की महापौर ने अपनी कुर्सी भारी मतों से बचाने में सफलता पायी. कुर्सी बचाओ तथा कुर्सी छीनो के इस संग्राम में अब छह सितंबर को उपमहापौर अमितांजलि सोनी की अग्निपरीक्षा है. हालांकि महापौर तथा उपमहापौर की कुर्सी बचाने तथा छीनने के दो अलग-अलग गुटों के बीच अंत-अंत तक दांव-पेच चलता रहा.
वहीं अभी विरोधी गुट हर हाल में उपमहापौर को कुर्सी से बेदखल करने की तैयारी में है. इसका ट्रेलर बुधवार को महापौर के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान दिखा. इस विरोधी गुट में उपमहापौर अमितांजलि सोनी हैं. इसमें सब मिलाकर 9 से 10 पार्षद संबंधित गुट के समर्थन में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कहे जा सकते हैं. वहीं 35 पार्षदों ने महापौर के पक्ष में चट्टानी एकता दिखायी.
महापौर एवं उपमहापौर के बीच अविश्वास प्रस्ताव से पूर्व ही कहीं न कहीं उपजे मतभेद भी खुलकर बुधवार को दिखाई दिये. छपरा नगर निगम परिसर में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधि व्यवस्था के मद्देनजर निगम परिसर के मुख्य द्वार पर तथा सभागार के मुख्य द्वार पर अलग-अलग सीओ व पुलिस बल की तैनाती की गयी थी, जिससे कोई भी अनधिकृत व्यक्ति परिसर में या सभागार में नहीं जा सकें.
परंतु, मजिस्ट्रेट की उदासीनता के कारण समर्थक व विरोधी गुट के दर्जनों की संख्या में लोग पैदल की कौन कहे वाहनों में आकर नगर निगम सभागार की चारों तरफ अवस्थित भवन, बरामदे आदि में बैठे हुए थे. इसे लेकर भी लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं.
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