फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर लेखापाल-जेइ बनने की उम्मीद पाले चार दर्जन अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ीं

Updated at : 24 Aug 2019 6:07 AM (IST)
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फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर लेखापाल-जेइ बनने की उम्मीद पाले चार दर्जन अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ीं

छपरा (सदर) : विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम से फर्जी अंक पत्र व प्रमाण पत्र कर सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद पाले लगभग चार दर्जन उच्च शिक्षाधारी जेइ तथा लेखापाल बहाली के अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. एक ओर जिन लेखापाल के अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र सही हैं, उन्हें अगली सप्ताह में नियुक्ति पत्र मिलेगा. वहीं […]

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छपरा (सदर) : विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम से फर्जी अंक पत्र व प्रमाण पत्र कर सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद पाले लगभग चार दर्जन उच्च शिक्षाधारी जेइ तथा लेखापाल बहाली के अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. एक ओर जिन लेखापाल के अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र सही हैं, उन्हें अगली सप्ताह में नियुक्ति पत्र मिलेगा. वहीं जेइ की बहाली पर तत्काल हाइकोर्ट ने रोक लगायी है.
वहीं फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर नौकरी के प्रयासरत इन दोनों पदों के चार दर्जन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाये जाने के बाद पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव के निर्देश के आलोक में प्राथमिकी की तैयारी की जा रही है. सरकार व प्रशासन के इस कड़े रुख के बाद फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर नौकरी की चाहत रखने वाले अभ्यर्थियों में हड़कंप मचा है.
81 लेखापाल तथा 81 जेइ के पदों पर बहाली के लिए 10 माह पूर्व ही हुई थी काउंसेलिंग : पंचायती राज विभाग के निर्देश के आलोक में सारण जिले के सभी 323 पंचायतों में से 81 पंचायतों में लेखापाल तथा जेइ की बहाली के लिए गत वर्ष 2018 के नवंबर में काउंसेलिंग हुई थी.
काउंसेलिंग के दौरान उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, मेघालय के विलियम कैरी विश्वविद्यालय शिलांग से येन-केन प्रकारेण स्नातकोत्तर व अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र काफी ऊंचे अंकों वाला पंचायती राज विभाग को जमा किया गया.
मेधा सूची निर्माण के दौरान इन सभी विद्यालयों से प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले अधिकतर छात्रों के प्राप्तांक 90 फीसदी से ज्यादा औसत पाये गये. ऐसी स्थिति में जो वास्तविक उम्मीदवार थे, वे मेधा सूची के वरीयता क्रम में काफी पीछे चले गये. इसे लेकर कई अभ्यर्थियों ने जिला प्रशासन व पंचायती राज विभाग को प्रमाणपत्र की जांच कराने की मांग की.
इसके बाद जिला प्रशासन ने पंचायती राज विभाग से मार्गदर्शन मांगा. इसमें पंचायती राज विभाग ने ऐसे अभ्यर्थियों को चयन पत्र देने के पूर्व इनके प्रमाणपत्रों की जांच कराने का निर्देश दिया था. जांच के क्रम में इन चार दर्जन अभ्यर्थियों के संबंधित विश्वविद्यालय ने अपने लिखित रिपोर्ट में दिया कि संबंधित अभ्यर्थी उनके विश्वविद्यालय के छात्र नहीं रहे हैं. उनका प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय के द्वारा निर्गत नहीं किया गया है. इसके बाद जिला प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई को अंतिम रूप देने में लगा है.
मालूम हो कि पूर्व में भी शिक्षक बहाली या अन्य बहाली में भी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का खेल उजागर होने के बाद पटना उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में निगरानी विभाग प्रमाणपत्रों की जांच कर फर्जी एवं गलत तरीके से बहाल शिक्षकों पर कानूनी कार्रवाई कर रही है. इसी प्रकार कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग आदि में विभिन्न लिपिक व कार्यक्रम पदाधिकारी के स्तर की बहाली में फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर दर्जनों ने नौकरी पायी.
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