बिहार : छपरा RPF पोस्ट में जवानों ने रातभर नाबालिग से किया रेप, छह सस्पेंड

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Nov 2018 7:01 PM

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छपरा : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंक्शन के रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट पर बालिका के साथ रातभर दुष्कर्म मामले में प्रभारी निरीक्षक शाहनवाज हुसैन समेत छह सुरक्षाकर्मियों को कमांडेंट ऋषि पांडेय ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया. रेलवे सुरक्षा बल के आइजी राजाराम ने इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था. […]

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छपरा : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंक्शन के रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट पर बालिका के साथ रातभर दुष्कर्म मामले में प्रभारी निरीक्षक शाहनवाज हुसैन समेत छह सुरक्षाकर्मियों को कमांडेंट ऋषि पांडेय ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया. रेलवे सुरक्षा बल के आइजी राजाराम ने इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था. उनके आदेश के कुछ ही घंटों के अंदर कमांडेंट ने त्वरित कार्रवाई की. इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ ही देर बाद महिला थाना की पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया.

इस घटना की पीड़िता की मेडिकल जांच सदर अस्पताल में कराया गया है. लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं आया है. इस मामले में बालिका के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है और इस मामले में हेड कांस्टेबल अशोक कुमार सिंह को नामजद किया गया है. घटना से सारण के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन समेत अन्य अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है. जांच में आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक शाहनवाज हुसैन को भी दोषी पाया गया है. उन पर आरोप है कि घटना की जानकारी होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किया और वरीय अधिकारियों को घटना के बारे में समय पर सही सूचना नहीं दिया.

इस मामले में सअनि वीरेंद्र पांडेय पर आरोप है कि वह बालिका को पकड़ कर लाये और महिला कांस्टेबल रेशमी कच्छप को कागज में सुपुर्द कर दिया लेकिन उसे भौतिक रूप से महिला कांस्टेबल के आवास पर रखने के बजाय आरपीएफ पोस्ट पर बालिका को रखा गया. महिला कांस्टेबल रेशमी कच्छप पर आरोप है कि लिखित रूप में बालिका को उसकी सुरक्षा में सौंपा गया था लेकिन वह अपने पास बालिका को नहीं रखी. इसमें हेड कांस्टेबल अशोक कुमार सिंह, कांस्टेबल ओएस सिंह और शिवाजी यादव को इस घटना के लिए दोषी माना गया है. दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने वालों की पहचान की जा रही है. कमांडेंट ऋषि पांडेय ने बताया कि इसकी जांच की जा रही है और इस मामले में और जो भी दोषी होंगे, बख्शा नहीं जायेगा.

यूं पहुंची RPF पोस्ट
पहले पति ने ठुकराया. मां-बाप के पास पहुंची तो, उन्होंने प्रताड़ित करना शुरू किया. वहां से बहन के यहां गयी. बहन के यहां से भाई के पास मिलने जाने के क्रम में सुरक्षाकर्मियों के हवस की शिकार बन गयी. यह कहानी है सीवान की उस अभागन बालिका की जिसके मां-बाप ने उसका बाल विवाह कर दिया. बाल विवाह के कारण शादी के कुछ ही दिन बाद बीमार पड़ी और बीमार होने के कारण घर के काम करने में असमर्थ हो गयी. फलत: उसकी पिटायी शुरू हो गयी. पति का घर छोड़कर मायके व बहन के यहां होते हुए भाई के पास जाने के क्रम में रेलवे सुरक्षा बल के जवान के हत्थे चढ़ी. जिसने अपनी हवस का शिकार बना लिया.

घटना के बारे में पीड़िता ने बालिका गृह के कांउसलर को बताया कि वह सीवान जिले के के नौतन थाना क्षेत्र में उसका मायके है और गोपालगंज जिले के फुलवरिया थाना क्षेत्र में 3 मार्च 2018 को शादी हुई, लेकिन वह नाबालिग है और उम्र करीब 17 वर्ष है. शादी के बाद बीमार रहने लगी जिसके कारण ठीक से काम नहीं करती थी तो, उसके साथ मारपीट की जाने लगी. इस वजह से वह अपने मायके आ गयी लेकिन आर्थिक तंगी के शिकार माता पिता भी प्रताड़ित करने लगे जिसके कारण वह अपनी बहन के यहां जाकर गोपालगंज रहने लगी. 29 अक्टूबर को वह गोपालगंज से दिल्ली के लिए चली. वह अपने भाई से मिलने दिल्ली जा रही थी. सीवान स्टेशन पर जब वह पहुंची तो, उसका एक चचेरा भाई मिला.

चचेरा भाई उसे अपने डेरा पर छपरा लाया. यहां डेरा पर रख कर वह बाजार चला गया. शाम को लौटा तो, वह शराब के नशे में धुत था, जिसके कारण वह भागकर छपरा जंक्शन पर आ गयी. उसका चचेरा भाई उसे ढूंढते हुए छपरा जंक्शन पर पहुंच गया. स्टेशन के बाहर ही चचेरा भाई उसे डेरा पर चलने की जिद करने लगा. इस पर विवाद हो गया और वहां भीड़ जमा हो गयी. भीड़ देख कर आरपीएफ के जवान पहुंच गये. आरपीएफ जवानों को देख कर उसका चचेरा भाई भाग गया. लेकिन उसे आरपीएफ जवानों ने पकड़ लिया और आरपीएफ पोस्ट पर लाया. पोस्ट पर उसने छोड़ने के आग्रह की तो, उसे छोड़ दिया गया लेकिन पुनः उसी समय पकड़ लिया गया और चाइल्ड लाइन को सौंपने ले जाया. चाइल्ड लाइन के कर्मचारी ने नहीं रखा तो, उसे आरपीएफ की महिला कांस्टेबल को लिखित रूप में सुपुर्द करने के लिए सरकारी आवास पर ले जाया गया लेकिन, वहां नहीं रख कर उप निरीक्षक कक्ष में बंद कर दिया, जिसके बाद आरपीएफ जवानों ने उसकी अस्मत लूट लिया.

इस तरह हुआ खुलासा
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब छपरा जंक्शन पर खुले चाइल्ड लाइन की महिला कर्मचारी व महिला कांस्टेबल के द्वारा बालिका गृह को सौंपी गयी बालिका की काउंसेलिंग की गयी. घटना के बारे में पता चला है कि 29 अक्टूबर की रात सात बजे छपरा जंक्शन के बाहरी परिसर में एक बालिका संदिग्ध हालत में मिली जिसे आरपीएफ के जवानों ने रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट पर लाया और चाइल्ड लाइन को सौंपने गये. उस समय चाइल्ड लाइन पर तैनात कर्मचारी जयप्रकाश ने यह कहते महिला को नहीं रखा कि उसके पास कोई महिला कर्मचारी नहीं है. इस पर रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने लिखित रूप में एक महिला कांस्टेबल को सरकारी आवास पर ले जाकर लिखित रूप में सुपुर्द कर दिया गया लेकिन बालिका को कांस्टेबल के आवास पर रखने के बजाय आरपीएफ पोस्ट के उप निरीक्षक कक्ष में लाकर बंद कर दिया गया. रात में बालिका के साथ आरपीएफ के एक जवान ने दुष्कर्म किया.

चाइल्ड लाइन की कर्मचारियों ने डांट कर कराया चुप
सुबह में चाइल्ड लाइन की महिला कर्मचारी व महिला कांस्टेबल से पीड़िता ने जब दुष्कर्म की घटना के बारे में कहा तो, डंडे से उसकी पिटाई कर चुप करा दिया गया. महिला को जब बालिका गृह को सौंप दिया गया, तब उसने अपनी पूरी आपबीती सुनायी. यह सुन कर बालिका गृह के अधिकारियों के भी होश उड़ गये. वह आनन-फानन में वरीय अधिकारियों को घटना की सूचना दी. इस पर तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया. बालिका गृह के अधिकारियों ने महिला की मेडिकल जांच कराया. अब मामला महिला थाना को सौंप दिया गया है. इधर इसकी जानकारी जब रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को हुई तो, आनन-फानन में जांच कर प्रभारी निरीक्षक समेत छह सुरक्षा बल के जवानों को निलंबित कर दिया गया है.

छपरा जंक्शन पर कमांडेंट ने की मामले की जांच
पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंक्शन पर दुष्कर्म की घटना की जांच करने शुक्रवार की शाम को वाराणसी मंडल के कमांडेंट ऋषि पांडेय पहुंचे. उन्होंने इस घटना से जुड़े स्थानों का मुआयना किया और रेलवे सुरक्षा बल व राजकीय रेलवे पुलिस के पदाधिकारियों, जवानों से घटना के बारे में पूछताछ की. उन्होंने छपरा जंक्शन पर लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज भी खंगाला. उनके आने के पहले छपरा सारण आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह, राजकीय रेलवे पुलिस के पुलिस निरीक्षक राजेश कुमार, भगवान बाजार थाना के पुलिस निरीक्षक सुरेंद्र कुमार, एसआईटी के पुअनि मनोज कुमार सिंह तथा मनीष कुमार और मनीष कुमार के अलावा काफी संख्या में जवान मुस्तैद रहे.

कमांडेंट पांडेय स्वतंत्रता सेनानी सुपर फास्ट ट्रेन से दिन के करीब तीन बजे पहुंचे. उतरते ही सबसे पहले वह उस कमरे में पहुंचे, जिस कमरे में दुष्कर्म की घटना हुई थी. उन्होंने आरपीएफ पोस्ट की बनावट को देखा. सबसे अधिक समय तक उन्होंने सीसीटीवी कैमरे का फुटेज खंगाला. उन्होंने चाइल्ड लाइन की महिला कर्मचारी व अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की. इस घटना से जुड़े कई पहलुओं की जांच की. स्टेशन के विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज खंगाला जिसमें बाहरी परिसर, चाइल्ड लाइन, आरपीएफ पोस्ट आने जाने के रास्ते समेत कई अन्य विंदुओं की जांच की.

इसके साथ ही कमांडेंट पांडेय ने पुलिस अधीक्षक हरकिशोर राय से शुक्रवार की शाम को मुलाकात की और घटना के बारे में की जा रही कार्रवाई पर चर्चा की. पुलिस अधीक्षक से मिलने के बाद कमांडेंट ने बातचीत का ब्योरा पत्रकारों को देने से इन्कार किया. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह आईपीसी का मामला है और इस मामले में पुलिस कार्रवाई कर रही है.

क्या कहते हैं एसपी

पुलिस अधीक्षक हरकिशोर राय ने कहा कि दुष्कर्म के मामले में बालिका के बयान पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी है. दुष्कर्म करने वाले आरपीएफ के हेड कांस्टेबुल को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस मामले में कई और लोग भी दोषी पाये गये है. जिन्हें गिरफ्तार करने के लिये छापेमारी की जा रही है.

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