2019 से गंगा में चलने लगेंगे मालवाहक जहाज

Updated at : 10 Aug 2017 5:24 AM (IST)
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2019 से गंगा में चलने लगेंगे मालवाहक जहाज

कवायद . विश्व बैंक की मदद से जल परिवहन मार्ग का किया जा रहा है विकास छपरा(सारण) : गंगा में जल परिवहन के लिए ड्रेजिंग जरूरी है. इसके लिए जल्द ही ग्लोबल टेंडर जारी होंगे. सारण जिले से होकर गुजरने वाली गंगा नदी का बनारस से हल्दिया के बीच 1381 किमी लंबी ड्रेजिंग करायी जायेगी. […]

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कवायद . विश्व बैंक की मदद से जल परिवहन मार्ग का किया जा रहा है विकास

छपरा(सारण) : गंगा में जल परिवहन के लिए ड्रेजिंग जरूरी है. इसके लिए जल्द ही ग्लोबल टेंडर जारी होंगे. सारण जिले से होकर गुजरने वाली गंगा नदी का बनारस से हल्दिया के बीच 1381 किमी लंबी ड्रेजिंग करायी जायेगी. गंगा नदी में दिसंबर 2019 से जहाज से माल ढुलाई शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण की अध्यक्ष नूतन गुहा विश्वास ने इस संबंध में गंगा नदी के तटवर्ती प्रमंडल के आयुक्त तथा जिले के डीएम को पत्र भेजकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है. प्राधिकरण की अध्यक्ष ने कहा है कि जल मार्ग परियोजना के विकास के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है.
जलमार्ग विकास परियोजना के तहत 4,200 करोड़ से इलाहाबाद व हल्दिया के 1,620 किलोमीटर नदी मार्ग को जलयान मार्ग के तौर पर विकसित करने की योजना बनायी गयी है. जिसे दिसंबर 2019 में पूरा कर लिया जायेगा. इसके बाद 1,000 टन भार वहन क्षमता के जहाजों का वस्तु व यात्री परिवहन के लिए परिचालन शुरू हो जायेगा. विश्व बैंक इसके लिए मदद दे रहा है. जहाज चलाने के लिए नदी में तीन मीटर की गहराई जरूरी है. ताकि 2,000 टन की भार वहन क्षमता का सुरक्षित परिवहन हो सके.
जहाजों का परिचालन शुरू होने से जल मार्ग से माल वहन को प्रोत्साहन मिलेगा ,जो पर्यावरण के अनुकूल है. ईंधन की भी खपत कम होती है. परिवहन का यह सस्ता माध्यम है.
100 एकड़ में बनेगा फ्रेट विलेज : प्राधिकरण ने सारण जिले के डोरीगंज में मल्टी मॉडल टर्मिनल का निर्माण कराने पर भी विचार कर रहा है. हल्दिया से छपरा, बलिया, बक्सर, वाराणसी होते हुए इलाहाबाद तक जल परिवहन प्रोत्साहित व विकसित करने के लिए केंद्र सरकार सारण में फ्रेट विलेज बनाने का प्रस्ताव तैयार करा रही है. बताया कि 100 एकड़ में प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर अनुमानित लागत करीब सात हजार करोड़ रुपये आयेगी. फ्रेट कॉरिडोर में छोटी-छोटी इंडस्ट्री, कार्गो, कंटेनर, पैकिंग और कच्चे माल की पैकिंग आदि की जायेगी. फ्रेट कॉरिडोर में भंडारण क्षेत्र होगा. यहीं से सड़क, रेल व वायु मार्ग से सामान को भेजा जा सकेगा. फ्रेट कॉरिडोर सारण के साथ ही उत्तर प्रदेश के बनारस तथा झारखंड राज्य साहेबगंज व हल्दिया आदि जगहों पर प्रस्तावित है.
हालांकि अभी अंतिम निर्णय होना शेष है. सारण में दो जहाज खड़े होंगे, एक साथ गंगा में जो जेटी बनायी जायेगी, वह दो सौ मीटर लंबी होगी और 35 मीटर चौड़ी. इस पर एक साथ दो जहाज खड़े हो जायेंगे. क्योंकि एक जहाज की अधिकतम लंबाई 90 मीटर होती है. इसके अलावा सुरक्षा के इंतजाम के लिए रेलिंग आदि लगेंगे.
साढ़े पांच हजार करोड़ की योजना : जल परिवहन के तहत सारण में टर्मिनल बनाने के लिए चरणबद्ध प्रस्ताव तैयार किया गया है. पहले चरण में जेटी व लाइट हाउस को प्राथमिकता दी गयी है. इसके लिए पांच हजार चार सौ करोड़ रुपये की योजना बनायी गयी है.
क्या है ड्रेजिंग
गंगा नदी में उच्च क्षमता वाले माल वाहक जहाज के परिचालन के लिए जल परिवहन मार्ग का निर्माण कराया जायेगा. मार्ग पर वाटर लेवल गहराई और चौड़ाई में समान रूप से रहे. इसके लिए नदी के गर्भ के सतह को एक लेवल में किया जायेगा. इसके लिए ड्रेजिंग कराने की योजना बनायी गयी है.
क्या कहते हैं डीएमं
केंद्रीय जल परिवहन मार्ग प्राधिकरण की ओर से कोई पत्र अभी नहीं आया है लेकिन पहले से ही गंगा नदी में हल्दिया से इलाहाबाद तक जल मार्ग को विकसित करने की सरकार की योजना है.
हरिहर प्रसाद, जिलाधिकारी, सारण
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