बालू का अवैध धंधा रोकने के लिए प्रशासन ने बनायी रणनीति
Updated at : 31 Jul 2017 8:19 AM (IST)
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छपरा (सदर) : अवैध बालू खनन को लेकर प्रभात खबर की ओर से लगातार खबर प्रकाशित करने के बाद रविवार को प्रशासन का तेवर तल्ख देखने को मिला. बालू के खनन पर रोक के बावजूद अवैध खनन, भंडारण एवं परिवहन में लगे अवैध धंधेबाजों के खिलाफ रविवार को जिला प्रशासन ने उच्च स्तरीय बैठक कर […]
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छपरा (सदर) : अवैध बालू खनन को लेकर प्रभात खबर की ओर से लगातार खबर प्रकाशित करने के बाद रविवार को प्रशासन का तेवर तल्ख देखने को मिला. बालू के खनन पर रोक के बावजूद अवैध खनन, भंडारण एवं परिवहन में लगे अवैध धंधेबाजों के खिलाफ रविवार को जिला प्रशासन ने उच्च स्तरीय बैठक कर लगाम लगाने की रणनीति तैयार की. सारण के डीएम हरिहर प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में रणनीति बनी की सोमवार से भारी संख्या में प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी रणनीति के तहत पुलिस बल की उपस्थिति में धंधेबाजों पर ठोस कार्रवाई की रणनीति बनी. विभागीय बैठक में कम से कम दो तीन घाटों पर पहले दिन कार्रवाई की तैयारी की गयी है तथा विभिन्न पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों की तैनाती की गयी है.
रविवार को भी सदर सीओ विजय कुमार सिंह ने 10 बालू लदे ट्रकों को चिह्नित किया है. जिन पर उन्होंने नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवश्यक कागजात तैयार करने की बात कही. एक जुलाई से 31 जुलाई तक सरकार द्वारा जलीय जीवों के प्रजनन के उपयुक्त जलवायु को देखते हुए बालू के खनन पर रोक लगायी गयी है.
परंतु, प्रशासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए छपरा से लेकर सोनपुर तक दर्जन भर स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में धंधेबाज बालू के खनन, भंडारण एवं परिवहन में नाव, ट्रक एवं ट्रैक्टर का इस्तेमाल प्रशासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए कर रहे थे. इस मामले में सरकार के कड़े रूख के बाद अब हर हाल में बालू के अवैध धंधे पर लगाम लगने की उम्मीद जगी है. बालू के अवैध खनन एवं परिवहन की निगरानी भी कर रही जांच
सारण जिले में बालू के अवैध खनन, भंडारण एवं परिवहन का धंधा बहुत पुराना है.गत वर्ष में तत्कालीन डीएम दीपक आनंद, एसपी पंकज कुमार राज के कार्यकाल के दौरान भी कुछ पदाधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व एवं आदेशों को चूना लगाते हुए एक फर्जी एवं रणनीति के तहत अवैध धंधे के लिए दिये जाने कुपन के आधार पर बालू के धंधे का मामला मीडिया में सुर्खियों में आने तथा प्रशासन व सरकार की किरकिरी होने के बाद पूरे मामले की जांच का जिम्मा निगरानी विभाग को दिया गया है, जिसमें निगरानी के पदाधिकारी समय-समय पर आकर विभाग से लेकर अन्य संबंद्ध लोगों से पूछताछ एवं साक्ष्य जुटाने में लगे हैं. ऐसी आशंका है कि इस जांच में भी कई पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य पर कार्रवाई होना तय है.
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