सूखने के कगार पर 1736 तालाब

Updated at : 29 Jul 2017 1:48 AM (IST)
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सूखने के कगार पर 1736 तालाब

समस्या. तालाबों की जलग्रहण क्षमता कम होने से मत्स्यपालन प्रभावित छपरा (सदर) : सरकार के मत्स्यपालन की योजना को अनुदान देकर धरातल पर उतारने के प्रयास में सबसे बड़ी बाधा मौसम की बेरुखी के साथ-साथ सरकारी जलकर क्षेत्रों की जलग्रहण क्षमता उड़ाही के अभाव में कम होना है. ऐसी स्थिति में एक ओर जहां मत्स्य […]

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समस्या. तालाबों की जलग्रहण क्षमता कम होने से मत्स्यपालन प्रभावित

छपरा (सदर) : सरकार के मत्स्यपालन की योजना को अनुदान देकर धरातल पर उतारने के प्रयास में सबसे बड़ी बाधा मौसम की बेरुखी के साथ-साथ सरकारी जलकर क्षेत्रों की जलग्रहण क्षमता उड़ाही के अभाव में कम होना है. ऐसी स्थिति में एक ओर जहां मत्स्य उत्पादन लाख प्रयास के बावजूद बढ़ नहीं पा रहा है. वहीं राजस्व की उगाही भी कई सरकारी तालाबों के परती पड़ जाने के कारण प्रभावित हुई है. 90 फीसदी सरकारी या गैर सरकारी तालाबों में एक से डेढ़ फुट भी पानी नहीं है. ऐसी स्थिति में निजी मत्स्य पालक किसान चाह कर भी अभी निजी तालाबों में मत्स्य बीज डाल नहीं सकते.
वहीं सरकारी तालाब व चंवर सूखे रहने के कारण मछली का बीज भी डालना मुश्किल है. जिले में 12.46 हजार मीटरिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है जो 983 सरकारी तालाबों तथा 753 निजी तालाबों के माध्यम से उत्पादन होना है. जबकि विभागीय विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी तालाब में मत्स्य उत्पादन के लिए तीन फुट से छह फुट पानी होना जरूरी है. मत्स्य के बीज डालने के दौरान ढाई से तीन फुट तथा उसके बाद मछली का वजन जितना ही बढ़ता है,
उसके वृद्धि के लिए अधिकतम छह फुट पानी की जरूरत बताते हैं. विभाग के फिल्ड अफसर नरेंद्र कुमार का कहना है कि इससे कम पानी में मत्स्य बीज डालना मुश्किल होता है. आखिर जब तालाब में न पानी रहेगा और न तालाब की जलग्रहण क्षमता बढ़ेगी, तो स्वाभाविक है कि वैसे सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती नहीं होगी. मशरक प्रखंड में 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले 29 तालाब उड़ाही के अभाव में पड़ती पर गये है. चालू मॉनसून के दौरान बारिश की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है.
50 फीसदी अनुदान पर 10 लाख मछली बीज किसानों को देगी सरकार : सरकार ने जिले में बेहतर मत्स्य उत्पादन के लिए 50 फीसदी अनुदान पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. जिसके तहत रोहु, कतला, नैनी, सिल्वर, ग्रास, गोल्डेन आदि वेराइटी के मछलियों के बीज मिलेंगे. किसान 10 अगस्त तक जिला मत्स्य कार्यालय में आवेदन देकर बीज प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि सरकारी अनुदान के अलावा जिले में इसुआपुर, भेल्दी, एकमा, बनियापुर में भी 10-10 लाख मिलियन मत्स्य बीज उत्पादन की क्षमता वाले मत्स्य हैचरी से भी किसान मछली बीज लेकर अपने तालाबों में मछली का बीज डालते हैं.
33 लाख 50 हजार रुपये राजस्व की वसूली का लक्ष्य : सरकार ने जिले में 33 लाख 50 हजार रुपये मत्स्य उत्पादन पर राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है. परंतु, बेहतर बारिश नहीं होने तथा नदियों के जलग्रहण क्षमता घटने के कारण मशरक प्रखंड के 29 तालाब जिनका क्षेत्रफल साढ़े 10 हेक्टेयर है वे परती पड़े हुए है वहां मत्स्य पालन बंद हो गया है. मत्स्य पालक मुसाफिर सहनी के अनुसार सरकार बंदोबस्ती एक साल के लिए तालाब का करती है. परंतु, उसकी उड़ाही कर उससे मिट्टी निकालने का काम विगत कई दशक से नहीं हुआ है, जिससे पानी नहीं रहने के कारण मत्स्य पालन प्रभावित होता है. यदि सरकार अपने स्तर से सरकारी तालाबों की उड़ाही कराये तो बेहतर मत्स्य उत्पादन निश्चित है.
मत्स्यपालन करने वालों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ 12.86 हजार मीटरिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य
मशरक में 29 तालाब परती क्षेत्र में तब्दील, 90 फीसदी तालाबों में डेढ़ फुट भी पानी नहीं
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