आयुष चिकित्सक लिखते हैं एलोपैथ की दवा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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कुव्यवस्था. भगवान भरोसे चल रहा है रिविलगंज का सीएचसी, मरीज परेशान

छपरा (सारण) : रिविलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक को यह पता नहीं है कि ओपीडी में मरीजों को कितने प्रकार की दवा उपलब्ध कराने का प्रावधान है. फार्मासिस्ट को भी यह पता नहीं है कि आपातकालीन कक्ष में मरीजों को कितने प्रकार की दवा उपलब्ध कराने का प्रावधान है. मजे की बात यह है कि यहां कार्यरत आयुष चिकित्सक मरीजों को एलोपैथ की दवा लिखते हैं. यहां हमेशा पुरुष-महिला वार्ड में ताला लटका रहता है. इतना ही नहीं,
यहां दंत चिकित्सालय कभी खुलता ही नहीं है. इसका कारण यह है कि दंत चिकित्सालय का सामान भंडार में रखा गया है और अब तक दंत चिकित्सालय शुरू ही नहीं किया गया है. यहां चिकित्सक तथा कर्मचारी रोस्टर के अनुसार ड्यूटी नहीं करते हैं, बल्कि अपनी सुविधा के अनुसार ड्यूटी करते हैं. पिछले दिनों सिविल सर्जन डॉ निर्मल कुमार ने निरीक्षण के दौरान ड्यूटी रोस्टर का पालन नहीं होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी और लिखित आदेश भी दिया कि ड्यूटी रोस्टर का अनुमोदन करा कर इसका अनुपालन सुनिश्चित करें. लेकिन, आपातकालीन कक्ष तथा ओपीडी का संचालन भी आयुष चिकित्सक कर रहे हैं, जिनको एलोपैथ की दवा लिखने का अधिकार नहीं है.
सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेदिक तथा होमियोपैथिक दवा नहीं है, लेकिन उनसे ड्यूटी कराया जा रहा है.
चिकित्सक को नहीं पता ओपीडी में मरीजों को कितने प्रकार की दी जाती है दवा
जिला मुख्यालय में रहते हैं चिकित्सा कर्मचारी
रिविलगंज सीएचसी में पदस्थापित चिकित्सक तथा कर्मचारी यहां नहीं रहते हैं. प्रखंड मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय छपरा में रहते हैं और निजी क्लिनिक चलाते हैं. यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को चिकित्सक अपने निजी क्लिनिक पर छपरा आकर दिखाने को कहते हैं. चिकित्सकों तथा कर्मचारियों की मनमानी के कारण गरीब व असहाय मरीज भी यहां इलाज के लिए आने से कतराते हैं.
हम यहां हमेशा नहीं रहते हैं. जब बुलाया जाता है, तो आते हैं. ओपीडी कितने प्रकार की दवा उपलब्ध कराने का प्रावधान है, यह हमें मालूम नहीं है. हम आयुष चिकित्सक हैं, लेकिन मरीजों को एलोपैथ की दवा लिखनी पड़ती है.
डॉ कविता विश्वकर्मा, आयुष चिकित्सक
ओपीडी में 33 प्रकार की दवा उपलब्ध कराने का प्रावधान है और 18 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं. इमरजेंसी में 100 प्रकार की दवा उपलब्ध कराने का प्रावधान है और 23-24 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं. प्रभारी छपरा से आती-जाती हैं.
सगीर आलम, फार्मासिस्ट, रिविलगंज सीएचसी
क्या कहते हैं मरीज
यहां दवा नहीं मिलता है और चिकित्सक हमेशा गायब रहते हैं. रात में प्रसव के लिए मरीज को लाने पर चिकित्सक बाहर नहीं निकलते हैं और दवा बाहर से खरीद कर लाने को कहा जाता है. यहां तक की दस्ताना भी बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है.
शिवशंकर भगत, मरीज
रिविलगंज सीएचसी में कर्मी काफी मनमानी करते हैं. यहां जख्म प्रतिवेदन देने के नाम पर लोगों से नाजायज राशि की वसूली की जा रही है और दिव्यांगों को प्रमाणपत्र देने में महीनों दौड़ाया जाता है. अधिकािरयों से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती.
कामेश्वर राय, मरीज
रात में बिजली नहीं रहने पर जेनेरेटर भी नहीं चलाया जाता है. जब मरीजों के परिजन शिकायत करते हैं, तो मरीजों को रेफर कर दिया जाता है. प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को घर पहुंचाने में एंबुलेंस चालक मनमानी करते हैं.
दीना प्रसाद, मरीज
आपातकालीन कक्ष में चिकित्सक मौजूद नहीं रहते हैं और मरीजों के आने के बाद उन्हें बुलाया जाता है. मारपीट और सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को बिना देखे ही चिकित्सक सदर अस्पताल रेफर कर देते हैं. इससे गरीब लोगों को काफी परेशानी होती है.
श्यामबाबू कुमार, मरीज
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