छह डॉक्टरों के भरोसे होता है इलाज

Updated at : 22 Jun 2017 4:16 AM (IST)
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छह डॉक्टरों के भरोसे होता है इलाज

पड़ताल. अस्पताल के एंबुलेंस से मरीजों को नहीं मिल पा रही है सुविधा मढ़ौरा : नुमंडल स्तरीय अस्पताल होने के बावजूद भी यह अस्पताल कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस अस्पताल में मरीजों के लिए कुल 30 बेड है, जो की साफ सफाई के अभाव में अपने दयनीय हालात पर आंसू बहा रहे हैं. […]

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पड़ताल. अस्पताल के एंबुलेंस से मरीजों को नहीं मिल पा रही है सुविधा

मढ़ौरा : नुमंडल स्तरीय अस्पताल होने के बावजूद भी यह अस्पताल कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस अस्पताल में मरीजों के लिए कुल 30 बेड है, जो की साफ सफाई के अभाव में अपने दयनीय हालात पर आंसू बहा रहे हैं. बेड पर साफ-सफाई और चादरों की प्रतिदिन धुलाई भी नहीं होती. इतने बड़े रेफरल अस्पताल में डॉक्टरों की कुल स्वीकृत पद 11 है, जबकि इस में मात्र छह डॉक्टर ही हैं. बाकी पांच डॉक्टरों का पद अभी भी खाली है. अस्पताल में महीने पहले दवाओं की घोर अभाव थी,
हालांकि अब इसमें परिवर्तन हुआ है और मरीजों को बेसिक स्तर की दवाइयां मिल रही है. अस्पताल में 33 दवाइयों की लिस्ट है जिसमें 26 दवाएं ही उपलब्ध हैं. डॉक्टर की माने, तो जो रोज की दिनचर्या वाले दवाएं हैं वहीं उपलब्ध हैं, जो सप्लाइ लायक नहीं हैं वह दवाइयां नहीं है. मरीजों को ओपीडी में देखने के बाद निर्गत परचे के अनुसार काउंटर से दवा दी जाती है. इस अनुमंडलीय अस्पताल में ओपीडी में एक महीने में छह से सात हजार तक औसतन मरीज आते हैं. जबकि इमरजेंसी में 500 से 1000 तक मरीज आते हैं. सरकारी नियमों के अनुसार डॉक्टर ड्यूटी नहीं करते हैं और ना ही रोस्टर के अनुसार. प्रतिदिन हर एक पालियों में रोस्टर बना हुआ है. मरीज बताते हैं डॉक्टर अपनी सेटिंग-गेटिंग करते हुए आपस में ही विचारोपरांत सप्ताह में एक दिन ही आते हैं. जिसके कारण मरीजों को इलाज में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. दैनिक ब्लड स्टोरेज यूनिट उपलब्ध होते हुए भी सिजेरियन नहीं होता है. कहने को तो इस अस्पताल में एक नहीं दो-दो एंबुलेंस उपलब्ध है. लेकिन मरीज का भी इसका फायदा तक नहीं उठा पाते हैं. दोनों ही एंबुलेंस खराब अवस्था में अस्पताल के किसी कोने में पड़े दिखाई पड़ते हैं. वहीं मढ़ौरा में कुल 30 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं. कुछ सरकारी भवन है तो कुछ प्राइवेट में ही चलता है. अस्पताल परिसर में गंदगी का भी घोर अभाव है, परिसर के आस-पास गंदे फैले रहते है, परंतु अस्पताल कर्मचारी इस पर ध्यान नहीं देते. वहीं अस्पताल भवन भी जर्जर स्थिति में ही है. अस्पताल के प्रसव केंद्र में भी मरीजों को परेशानी झेलती पड़ती है, सुविधा के नाम पर जेनरेटर तो है, परंतु समयानुसार चलाया नहीं जाता. मरीजों के चिल्लाने के बाद ही जेनरेटर चालू किया जाता है. अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे करनेवालों में गुणवत्ता की परख तक नहीं है, और न ही इसके लिये नियुक्त कर्मचारी अपनी सीट पर रहते हैं, मरीजों की माने, तो इसमें नियुक्त कर्मचारी खुद ड्यूटी से गायब रहते है.
हाल मढ़ौरा अस्पताल का
महीनों पहले यहां इलाज के बाद अधिकतर दवाइयां बाहर से ही लेनी पड़ती थी, परंतु अब जरूरत की सभी दवाइयां अस्पताल में ही मिल जाती है.
रिशा मुनी देवी, मरीज
साफ-सफाई का अभाव है, मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं, परन्तु गंदगी देख मन ही मन डरे रहते हैं. जबकि अस्पताल में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए.
नागेश्वर राय, मरीज
अस्पताल में सुविधाओं का घोर अभाव है. अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जांच रूम में बैठे कर्मचारी मरीजों से बेहतर जांच के लिये पैसे की डिमांड करते हैं.
अनिल ठाकुर, मरीज
लैब टेक्नीशियन और ड्रेसर की कमी की वजह से बेहतर व्यवस्था नहीं हो पा रही है. इस वजह से लोगों को सुविधा देने में परेशानी हो रही है.
सुशील कुमार गौतम, स्वास्थ्य प्रबंधक मढ़ौरा
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