तर्कपूर्ण दृष्टि व तटस्थ होकर करें इतिहास लेखन : कुलपति
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 May 2024 11:54 PM
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि तत्कालीन परिस्थिति व परिवेश के प्रभाव के अनुसार इतिहास लेखन होता रहा है.
दलसिंहसराय : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि तत्कालीन परिस्थिति व परिवेश के प्रभाव के अनुसार इतिहास लेखन होता रहा है. समय के अनुसार उसकी समीक्षा करते हुए अपनी स्व चेतना के साथ तर्कपूर्ण दृष्टि से तटस्थ होकर इतिहास लेखन करना चाहिए. यह समाज एवं राष्ट्र के हित में होगा. वे स्थानीय रामाश्रय बालेश्वर महाविद्यालय में शुक्रवार को दो दिनी राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे. बढ़ती स्व-चेतना के मध्य वर्तमान भारतीय इतिहास चिंतन एवं लेखन विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए आइसीएचआर के पूर्व सदस्य प्रो. राजीव रंजन ने कहा कि इतिहास को जिस रूप में प्रचारित-प्रसारित किया गया है वह हमारे साथ धोखा है. अपनी गुलाम मानसिकता को त्यागकर स्व चेतना के साथ पुनः इतिहास लेखन की आवश्यकता है. मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय के प्रो. अजीत कुमार ने स्व शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हमारे इतिहास में इतना अधिक झूठ परोसा गया है कि चाहकर भी हमारे युवा उससे मुक्त नहीं हो पा रहे हैं. आवश्यकता है कि हम स्वचेतना का मार्ग अपनाते हुए नवीन व सकारात्मक इतिहास लेखन को प्रश्रय दें. मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्यामा राय ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास आज हमसे स्व की मांग कर रहा है. अपने अतीत को स्वाभिमान में बदलने के लिए हमें पुनः स्व के बोध के साथ इतिहास लेखन की जरूरत है. मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने कहा कि हम भारतीय इतिहास की बनी बनायी पूर्व परिपाटी को ही ढो रहे हैं. यह हमारी अस्मिता की सही परख नहीं कराता. इतिहास को नवीन चेतना व स्वानुभूति के बल पर नये सिरे से लिखने की जरूरत है. डॉ. प्रतिभा पटेल, शिवानी प्रकाश एवं वेदिका के संयुक्त संचालन में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सह उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. बाल मुकुंद पाण्डेय ने अपनी अभिव्यक्ति में स्व की शास्त्रीय व्याख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्व को जानने की परंपरा की नींव भारतीय मनीषियों ने दी है. स्व का बोध व्यक्ति, समाज व राष्ट्र को स्वाभिमानी बनाता है. कालांतर में हम विदेशियों, आक्रमणकारियों के कुप्रभाव से धीरे-धीरे स्व चेतना से विमुख होकर उनके द्वारा स्थापित इतिहास के प्रति गलत धारणा को आज भी ढो रहे हैं. आज हम राष्ट्रवादियों के लिए जरूरत है कि हम हर स्तर पर नवीन दृष्टि अपनाते हुए हकीकत की खोज कर नये सिरे से इतिहास लेखन करें. ऐसा करके ही हम नवीन, स्वतंत्र, समृद्ध, विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर पायेंगे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजकिशोर ने किया. भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एवं स्नातकोत्तर इतिहास विभाग आरबी कालेज स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय एवं इतिहास संकलन समिति उत्तर बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में सरस्वती वंदना एवं कुलगीत गाया गया. स्वागत गीत सुप्रिया एवं उनकी टीम ने प्रस्तुत किया. प्रो झा ने अतिथियों को पाग, चादर, गुलदस्ता एवं प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










