समस्तीपुर में 3,545 शिक्षकों के फोल्डर गायब, 11 साल से अटकी जांच; 105 पर पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR

प्रतीकात्मक तस्वीर
जिले में 11 साल से 3,545 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच अटकी हुई है, क्योंकि उनके फोल्डर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. अब तक 105 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन जांच धीमी है.
Fake Teacher Investigation: जिले में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है. 11 साल से चल रही निगरानी जांच के बावजूद अब तक 3,545 शिक्षकों के फोल्डर निगरानी विभाग को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इससे फर्जी नियुक्तियों की जांच प्रभावित हो रही है.
2015 से जिले में कैंप कर रही है निगरानी टीम
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 2015 से निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम समस्तीपुर में प्रमाणपत्रों की जांच कर रही है. विभाग का कहना है कि शिक्षकों के फोल्डर उपलब्ध कराने के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक सभी अभिलेख नहीं मिले हैं.
इन वर्षों में कई जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और डीपीओ (स्थापना) बदले, लेकिन लंबित फोल्डरों की समस्या जस की तस बनी हुई है.
फोल्डर में क्या-क्या होता है?
नियोजित शिक्षकों के फोल्डर में शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, मेधा सूची, संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय की जानकारी और नियुक्ति से जुड़े अन्य दस्तावेज रहते हैं. इन दस्तावेजों के बिना प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा नहीं माना जाता.
105 फर्जी शिक्षकों पर दर्ज हो चुकी है FIR
निगरानी विभाग के अनुसार अब तक जांच के दौरान 105 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, इनमें कितनों की सेवा समाप्त हुई और कितनों से वेतन की वसूली की गई, इसकी जानकारी शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है.
विभाग का मानना है कि शेष 3,545 फोल्डरों की जांच पूरी होने पर और भी फर्जी नियुक्तियों का खुलासा हो सकता है.
फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर होगी कार्रवाई
नियमों के अनुसार यदि जांच में किसी शिक्षक का शैक्षणिक या प्रशिक्षण प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो उसकी सेवा समाप्त की जाएगी. साथ ही उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होगी और पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत अब तक मिले वेतन की वसूली भी की जाएगी.
जिला स्तर पर इस कार्रवाई की निगरानी की जिम्मेदारी डीपीओ (स्थापना) की होती है.
कुल 11,454 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की होनी है जांच
जिले में 11,454 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच होनी है. इनमें से अभी भी 3,545 शिक्षकों के फोल्डर उपलब्ध नहीं हो सके हैं, जिससे जांच की रफ्तार धीमी बनी हुई है.
किन प्रखंडों में सबसे ज्यादा फोल्डर लंबित
| प्रखंड | कुल फोल्डर | उपलब्ध | लंबित |
| उजियारपुर | 838 | 0 | 838 |
| पटोरी | 454 | 57 | 397 |
| विभूतिपुर | 819 | 478 | 341 |
| रोसड़ा | 571 | 240 | 331 |
| कल्याणपुर | 912 | 588 | 324 |
| ताजपुर | 465 | 160 | 305 |
| मोहनपुर | 225 | 0 | 225 |
| बिथान | 425 | 250 | 175 |
| शिवाजीनगर | 562 | 425 | 137 |
| समस्तीपुर | 770 | 636 | 134 |
| हसनपुर | 659 | 537 | 122 |
इसके अलावा मोहिउद्दीननगर (97), सिंघिया (47), विद्यापतिनगर (38) और खानपुर (34) सहित अन्य प्रखंडों के भी कई फोल्डर लंबित हैं.
इधर, स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर लंबित फोल्डर जल्द उपलब्ध कराने और प्रमाणपत्र जांच की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है, ताकि फर्जी नियुक्तियों के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई हो सके.
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