Education news from Samastipur: विभूतिपुर (समस्तीपुर): कहते हैं कि हुनर किसी संसाधनों का मोहताज नहीं होता. इसे सच कर दिखाया है बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने. उत्क्रमित मध्य विद्यालय महथी टोले आलमपुर और प्राथमिक उर्दू विद्यालय आलमपुर में आयोजित ”TLM (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) मेले” में जब शिक्षकों ने कबाड़ से बने शानदार शिक्षण मॉडल पेश किए, तो देखने वाले दंग रह गए.
गणित और विज्ञान अब खेल-खेल में!
शिक्षकों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए ”कबाड़ से जुगाड़” तकनीक का इस्तेमाल किया. उन्होंने बेकार पड़ी वस्तुओं से ऐसे मॉडल तैयार किए जिनसे गणित, विज्ञान और भाषा जैसे कठिन विषयों को बच्चे आसानी से खेल-खेल में समझ सकें. इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को बोझिल बनाने के बजाय मनोरंजक और प्रभावी बनाना है.इन शिक्षकों ने जीता सबका दिल
मेले में उत्कृष्ट मॉडल पेश करने वालों में पंकज कुमार, हंसराज, नेहा अग्रवाल, सुलेखा कुमारी, राहुल कुमार, सुजीत कुमार, सुजीत राय और तौकीर आलम शामिल रहे. निर्णायक मंडल (मकबूल अहमद, महेश प्रसाद, अजीत कुमार प्रभाकर आदि) ने मॉडलों की गुणवत्ता और उनकी उपयोगिता के आधार पर शिक्षकों की जमकर सराहना की.
क्या बोले प्रधानाध्यापक?
प्रधानाध्यापक अजय कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे आयोजनों से शिक्षकों की छिपी प्रतिभा निखरती है. उन्होंने कहा:“खेल-खेल में सीखने की इस प्रक्रिया से बच्चों का स्कूल के प्रति लगाव बढ़ता है. जब बच्चे अपनी आंखों के सामने इन मॉडलों को काम करते देखते हैं, तो उनका कॉन्सेप्ट हमेशा के लिए क्लियर हो जाता है. “
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