सौर ऊर्जा क्रांति में समस्तीपुर आगे, 10,631 ग्रामीण परिवारों के घर लगेंगे रूफटॉप सोलर सिस्टम

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घरों पर लगा सोलर रूफटॉप सिस्टम | Prabhat Khabar Network

घरों पर लगा सोलर रूफटॉप सिस्टम

समस्तीपुर जिला नवीकरणीय ऊर्जा में अव्वल आ रहा है. केंद्र और राज्य की योजनाओं से हजारों परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है. 10,631 ग्रामीण घरों में मुफ्त सोलर सिस्टम लगेंगे और 712 घरों में बिजली आपूर्ति शुरू हो गई है.

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Samastipur News: ऊर्जा विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार समस्तीपुर जिला नवीकरणीय और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजनाओं के तहत जिले के हजारों परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया है. विभाग के अनुसार जिले में दो प्रमुख योजनाओं के माध्यम से सौर ऊर्जा का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है.

  10,631 ग्रामीण परिवारों को मिलेगा सोलर सिस्टम

आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन (यूएलए) फेज-1 योजना के तहत जिले के 10,631 ग्रामीण उपभोक्ताओं को चिन्हित किया गया है. इन परिवारों के घरों पर कुल 11.7 मेगावाट क्षमता वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य तय किया गया है. प्रत्येक चयनित परिवार को 1.1 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट बिना किसी अग्रिम भुगतान के उपलब्ध कराया जाएगा.

पीएम सूर्य घर योजना में भी समस्तीपुर अग्रणी

पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत जिले में अब तक 712 उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर प्लांट सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं. इन सभी को मुख्य बिजली ग्रिड से जोड़ दिया गया है, जहां बिजली उत्पादन और उपभोग नियमित रूप से शुरू हो चुका है. इससे स्पष्ट है कि शहरी और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में भी लोग सौर ऊर्जा को तेजी से अपना रहे हैं.

बैंक ऋण प्रक्रिया हुई आसान

कार्यपालक अभियंता आनंद कुमार ने बताया कि योजना को सरल बनाने के लिए बैंकों के साथ विशेष समन्वय स्थापित किया गया है. पहले सौर ऊर्जा ऋण आवेदनों की अस्वीकृति दर करीब 48 प्रतिशत थी, जिसे राज्य सरकार की पहल और बैंकिंग समन्वय के बाद घटाकर 11 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे अब आम लोगों को बिना अतिरिक्त गारंटी के आसानी से ऋण उपलब्ध हो रहा है.

आम लोगों को होंगे ये बड़े लाभ

ऊर्जा विभाग के अनुसार इस योजना से परिवारों का मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो सकेगा, जिससे सालाना 10 से 15 हजार रुपये तक की बचत संभव होगी. ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली उपलब्ध होने से पढ़ाई और छोटे घरेलू उद्योगों को भी लाभ मिलेगा. साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

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