पूसा कृषि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेमिनार, महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि पर मंथन
पूसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय
RPCAU Pusa National Seminar: पूसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय ने कहा कि कृषि-खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भूमिका को नेतृत्व में बदलना समय की आवश्यकता है. उन्होंने महिला किसानों को तकनीक, ऋण, बाजार और निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर देने पर जोर दिया.
RPCAU Pusa National Seminar: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा के विद्यापति सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि-खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भूमिका को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया. सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय ने कहा कि टिकाऊ कृषि विकास के लिए महिला किसानों को तकनीक, वित्तीय सहायता और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.

कृषि की रीढ़ हैं महिलाएं, लेकिन योगदान अब भी अदृश्य
कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय ने कहा कि भारत में कृषि अनुसंधान की शुरुआत पूसा से हुई थी और आज भी कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान लगभग 80 प्रतिशत है. इसके बावजूद उनके श्रम को अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा कि महिला किसानों के अदृश्य योगदान को नेतृत्व में बदलने के लिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाना होगा.
पशु सखी की तर्ज पर पोषण सखी बनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए “पशु सखी” की तर्ज पर “पोषण सखी” जैसी पहल शुरू की जानी चाहिए. इससे महिलाओं की भागीदारी कृषि के साथ पोषण और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी मजबूत होगी.
महिला किसानों तक पहुंचे आधुनिक तकनीक
कुलपति ने कहा कि महिला किसानों को ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि परामर्श, जलवायु अनुकूल बीज, कृषि यंत्रीकरण, समय पर ऋण और बेहतर बाजार सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है. इसके लिए महिला केंद्रित विस्तार रणनीति तैयार करनी होगी, जिससे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तकनीक गांव तक पहुंचे.
सम्मेलन से निकलेंगे व्यावहारिक मॉडल
डॉ. पाण्डेय ने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय सम्मेलन नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे नवाचारकर्ताओं को एक मंच प्रदान करेगा. यहां से ऐसे व्यावहारिक मॉडल विकसित होंगे, जो महिला किसानों की आय बढ़ाने, कुपोषण कम करने और टिकाऊ कृषि विकास को नई दिशा देंगे.
लैंगिक समानता आधारित कृषि विकास के लिए प्रतिबद्ध विश्वविद्यालय
उन्होंने कहा कि आरपीसीएयू, पूसा लैंगिक समानता आधारित कृषि विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी महिला किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा.
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