Samastipur News:समस्तीपुर : शहर का राजकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय परिसर शुक्रवार को सुबह से ही सुर्खियों में रहा. सुबह दर्जनों की संख्या में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षु शिक्षक शीतलहर के बीच प्रशासनिक भवन के बाहर आक्रोशित नजर आये. आक्रोशित शिक्षकों का कहना था कि सुबह के 7 बजे से लेकर 10:15 बजे तक कॉलेज के प्राचार्य के निर्देश पर कॉलेज के ऑडिटोरियम हॉल में आने से रोका गया. प्रशिक्षु शिक्षकों को लगातार भयंकर शीतलहर के बीच रहने को मजबूर किया गया. वहीं दूसरी ओर वैसे प्रशिक्षु शिक्षक जो हॉल के अंदर गये थे, वे भी योगा प्रशिक्षण के नाम पर करीब 3 घंटे तक प्रशिक्षु शिक्षक न होकर बंधक के रूप में फंसे रहे. आक्रोशित शिक्षकों ने बताया कि कई प्रशिक्षु शिक्षक- शिक्षिकाएं शौचालय जाने एवं दवा लेने जाने देने की मिन्नतें लगातार प्राचार्य से कर रहे थे. किंतु वह अभद्र शब्दों का प्रयोग करते हुए उन प्रशिक्षु शिक्षकों को लगातार नित्य क्रिया पर भी पाबंदी लगा दी. इधर, प्राचार्य पवन कुमार सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए शिक्षकों को ससमय उपस्थित होकर निर्देशानुसार प्रशिक्षण लेने की नसीहत दी. इधर, डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ससमय नहीं आने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. बताते चलें कि सीटीई में वर्ग 3 से 5 में पढ़ाने वाले शिक्षकों का आवासीय प्रशिक्षण 15 दिसंबर से 19 दिसंबर तक आयोजित किया गया था. इसमें कुल 300 शिक्षक प्रशिक्षण के लिए नामित थे. इसमें लगभग 270 शिक्षक इस सत्र में प्रशिक्षण ले रहे हैं. शुक्रवार को अचानक भयंकर शीतलहर के बीच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षु शिक्षकों के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर काफी आक्रोश दिखा. इसी दौरान किसी प्रशिक्षु शिक्षक द्वारा 112 नंबर पर डायल कर मदद की गुहार लगाई गई. इसके पश्चात पुलिस प्रशासन का आगमन हुआ. करीब 10: 15 बजे के करीब द्वार खुलवाया गया.
व्यवस्था मानक के ठीक विपरीत मिली
उजियारपुर प्रखंड के दिव्यांग शिक्षक शंभू प्रसाद सिंह ने बताया कि पिछले 3 घंटे से उन्हें शौच लगी हुई थी. उन्हें शौचालय तक नहीं जाने मे परेशानी हुई. कॉलेज प्रशासन एससीईआरटी की नियमावली की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी मनमानी पर उतर आया है. उजियारपुर के शिक्षक गणेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए जो व्यवस्था थी वह मानक के ठीक विपरीत मिली. चेतना सत्र का आयोजन भी नहीं हुआ. इसके अलावा 8:00 बजे से लेकर 9:00 बजे तक नाश्ते का समय था, उसे पर भी इनका कोई ध्यान नहीं शुक्रवार को दिया गया. वहीं कुछ प्रशिक्षु शिक्षक शिक्षिका ने भोजन की गुणवत्ता पर भी भारी आक्रोश व्यक्त किया है. मौसम के अनुकूल कंबल या गुणवत्तापूर्ण बिस्तर या पीने के लिए पानी भी सही मात्रा में उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी. शौचालय की साफ सफाई भी भगवान भरोसे था.
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