बदलते परिवेश में लोगों को संतुलित न्यूट्रिशन की जरूरत : डॉ. देवेंद्र
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 16 Nov 2024 10:48 PM
जलवायु परिवर्तन की दौर एवं बदलते मौसम के परिवेश में लोगों को संतुलित न्यूट्रिशन लेने की जरूरत है. बिहार की भूमि को एक वैज्ञानिक की हैसियत से बहुत लंबे अरसे से देखता और समझते आ रहा हूं.
पूसा : जलवायु परिवर्तन की दौर एवं बदलते मौसम के परिवेश में लोगों को संतुलित न्यूट्रिशन लेने की जरूरत है. बिहार की भूमि को एक वैज्ञानिक की हैसियत से बहुत लंबे अरसे से देखता और समझते आ रहा हूं. मिलेट्स का उत्पादन खासकर पठारी क्षेत्रों में अधिकाधिक रूप से किया जाता है. परंपरागत रूप से सामा और कोदो की खेती होती थी. लोग स्वस्थ भी रहते थे. युग परिवर्तन के साथ एवं आधुनिक तकनीकों के आने बाद लोग धान एवं गेहूं की खेती पर जोर देना शुरु कर दिये. नतीजतन लोगों का स्वास्थ्य विपरीत परिस्थितियों से जूझने लगा. अब सरकार की मुहिम के अनुरूप मोटे अनाजों की खेती पर दर्जनों कार्यक्रम चलाकर संतुलित आहार के रूप में लोगों के थाली में परोसने की समुचित व्यवस्था की जा रही है. फसलों में विविधताएं लाने की जरूरत है. उक्त बातें डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित संचार केंद्र के पंचतंत्र सभागार में मोटे अनाज की फसलों का महत्व भविष्य और उपयोग विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शस्य विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष सह शुगर केन निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि समय परिवर्तनशील है. बिहार में मिलेट्स की खेती पहले 5 लाख हेक्टेयर में होती थी, जबकि आज सम्पूर्ण बिहार में महज 10 हजार हेक्टेयर में ही की जा रही है. जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है.
मोटे अनाज को बढ़वा देने पर ही मिट सकता कुपोषण
अधिष्ठाता पीजीसीए सह प्रभारी प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. मयंक राय ने स्वागत करते हुए कहा प्राकृतिक संपदा को भविष्य के पीढ़ियों के लिए संरक्षित एवं सुरक्षित रखने की जरूरत है. मोटे अनाज की खेती में पानी एवं उर्वरक का बहुत कम प्रयोग होता है. जिससे उत्पादकों को कम लागत के कारण अत्यधिक मुनाफा मिलने की संभावना होती है. वैज्ञानिक डॉ. फूलचंद ने कहा मोटे अनाज की खेती के दौरान रोग कीट प्रबंधन के दिशा में कार्य करने की जरूरत है. संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन करते हुए वैज्ञानिक सह प्रसार शिक्षा उप निदेशक प्रशिक्षण डॉ. विनिता सतपथी ने कहा कि बिहार में मोटे अनाज का सीड्स उत्पादन पर कार्य करने की जरूरत है. मिलेट्स का उत्पादन, प्रसंस्करण के साथ उत्पादों का वैल्यू एडिशन कर बाजार में देने पर उत्पादक बेहतर लाभ ले सकते हैं. मौके पर सुरेश कुमार, धर्मेश कुमार, सूरज कुमार सहित टेक्निकल टीम आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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