Lal Krishna Advani: जब राम रथयात्रा के दौरान समस्तीपुर में रात 1:30 बजे गिरफ्तार हुए थे आडवाणी, जानिए पूरी कहानी
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 14 Dec 2024 5:15 PM
Lal Krishna Advani: बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की अचानक तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आइये लालकृष्ण आडवाणी से जुड़े एक वाक्या के बारे में जानते हैं, जब राम मंदिर आंदोलन के समय बिहार के समस्तीपुर में उन्हें रात 1:30 बजे गिरफ्तार किया गया था.
Lal Krishna Advani: भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी (97) की अचानक एक बार फिर तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें देर रात इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है. लालकृष्ण आडवाणी की पिछले कुछ दिनों से तबीयत खराब चल रही थी. बीते चार से पांच महीनों के भीतर लालकृष्ण आडवाणी चौथी बार अस्पताल में भर्ती हुए हैं. इससे पहले उन्हें अगस्त के महीने में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसी साल आडवाणी को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते वे राष्ट्रपति भवन के आयोजन में नहीं पहुंच सके. उन्हें आवास पर ही भारत रत्न दिया गया था. आज हम आपसे 90 के दशक का एक किस्सा साझा करने जा रहे हैं जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी राम मंदिर के लिए आंदोलन कर रहे थे.

समस्तीपुर में 23 अक्टूबर को होनी थी लालकृष्ण आडवाणी की सभा
लगभग 500 वर्षों के इंतजार के बाद जब राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा हुआ तो करोड़ों रामभक्तों की आंखो में खुशी के आंसू थे. इस मंदिर को बनाने के लिए राम भक्तों ने किस प्रकार की यातनाएं झेली, कितनों ने जान गंवाई, कितनों ने गोली खाई सब लोग इस पर बात कर रहे थे. उन्हें नमन कर रहे थे. लेकिन देश के करोड़ों लोगों में राम मंदिर बनने की आस जगाने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को इस काम के लिए गिरफ्तार कर लिए गया था.
बात वर्ष 1990 की है जब लालकृष्ण आडवाणी ने श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के संकल्प को लेकर गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को शुरू की थी. यह यात्रा जहां-जहां से गुजर रही थी, लाखों लोग जुट रहे थे. आडवाणी की इस रथयात्रा को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा था.
लालकृष्ण आडवाणी इस रथ यात्रा को लेकर 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचने वाले थे. यहां से उनको कार सेवा में शामिल होना था. देश के अलग-अलग राज्यों से होते हुए यह रथ यात्रा बिहार में गया से शुरू हुई. बिहार के अलग-अलग जिले से होते हुए 22 अक्टूबर 1990 की देर शाम समस्तीपुर जिला पहुंची.

समस्तीपुर के पटेल मैदान में 23 अक्टूबर 1990 को लालकृष्ण आडवाणी के द्वारा एक जनसभा को संबोधित किया जाना था. इसको लेकर बीजेपी, आरएसएस, विद्यार्थी परिषद सहित संघ के तमाम अनुसांगिक संगठनों के द्वारा बड़े स्तर पर तैयारी की गई थी. आडवाणी की रथ यात्रा जब हाजीपुर होते हुए समस्तीपुर में कोठिया के पास पहुंची, वहीं से जय श्रीराम के नारों के साथ लगातार हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं का हुजूम स्वागत कर रहा था. हर उम्र के लोग इस रथ यात्रा के समर्थन में सड़क पर उतर गए थे. चारों ओर सिर्फ भगवा झंडा लहरा रहा था. आम लोग हर चौक-चौराहे पर पुष्प वर्षा और रथ की आरती उतार रहे थे.
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जब गिरफ्तार हुए आडवाणी
पूरे शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई थी. समस्तीपुर जिला हाई अलर्ट पर था. लालकृष्ण आडवाणी समस्तीपुर सर्किट हाउस के कमरा नंबर 7 में रुके थे. 23 अक्टूबर 1990 को रात 1.30 बजे कमरा नंबर-7 का दरवाजा नॉक होता है तब आडवाणी नींद से उठकर दरवाजा खोलते हैं. दरवाजे पर दो अधिकारी थे. आडवाणी जब तक कुछ समझ पाते तभी उनमें से एक अधिकारी बोलते हैं- आप गिरफ्तार हो गए हैं.
गिरफ्तारी की बात सुनकर आडवाणी हंसने लगे और उन्होंने कहा- विनाश काले विपरीत बुद्धि. जब उनकी गिरफ्तारी हुई उस समय देश के मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी उनके साथ थे. इसके बाद आडवाणी को दुमका के मसानजोर डैम स्थित गेस्ट हाउस ले जाया गया. इस घटना के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने समर्थन वापस लेकर केंद्र की वीपी सिंह वाली सरकार गिरा दी थी.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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