Samastipur News:बिना प्रस्वीकृति के चल रहे दर्जनों विद्यालय

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Samastipur News:बिना प्रस्वीकृति के चल रहे दर्जनों विद्यालय

प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों विद्यालय बगैर प्रस्वीकृति के चल रहे हैं. इन विद्यालयों के पास न तो बच्चों के लिए बैठने की उचित जगह है और न ही दुरुस्त कमरे.

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Samastipur News:मोरवा : प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों विद्यालय बगैर प्रस्वीकृति के चल रहे हैं. इन विद्यालयों के पास न तो बच्चों के लिए बैठने की उचित जगह है और न ही दुरुस्त कमरे. ऐसे में जर्जर भवन और झोपड़ियों में विद्यालय संचालित कर बच्चों के साथ खिलवाड़ हो रहा है. अधिकारियों की माने तो प्रखंड में वैसे कई विद्यालयों को भी प्रस्वीकृति प्रदान की गई है जिसके पास मुकम्मल भवन नहीं है. दर्जनों विद्यालय झोपड़ियों में चल रहे हैं. कहीं टीन के शेड लगाकर तो कहीं पॉलिथीन टांगकर स्कूल की शुरुआत हो रही है. हर साल दर्जनों विद्यालय खुल रहे हैं लेकिन उसे पर प्रशासन की नजर नहीं है. बताया जाता है कि प्रखंड क्षेत्र के 22 विद्यालय को ही अब तक प्रस्वीकृति मिली है. यू डायस मिलना भी अभी दर्जनों विद्यालय का बाकी है लेकिन विद्यालयों के संचालन की देखभाल विभाग के द्वारा नहीं की जा रही है. विद्यालय भवन के कमजोर होने की वजह से दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है. इन विद्यालय में मानक का ख्याल नहीं रखा जाता है. न तो अग्निशमन की व्यवस्था होती है और ना ही आपदा से निपटने की कोई उपाय. ऐसे में अभिभावकों के द्वारा बच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालय में भेजा जाता है लेकिन दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है. स्वच्छ पेय जल, शौचालय और बच्चों के लिए खेलने की जगह इन विद्यालयों में नहीं पायी जाती है. फिर भी विभाग का ध्यान इस तरफ नहीं है. शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है. बताया जाता है कि अधिकारियों की उदासीनता की वजह से प्रखंड क्षेत्र में रोज नये विद्यालय खुलते हैं लेकिन उसके प्रस्वीकृति नहीं मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. कार्यालय के कर्मियों का कहना है कि अधिकारियों की उदासीनता और क्षेत्र में निरीक्षण नहीं की जाने के कारण लगातार विद्यालय की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन उसे हिसाब से बच्चों और विद्यालयों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पा रहा है. इससे सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी प्रभावित हो रही है. नामांकन तो सरकारी विद्यालय में होता है वहीं बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं. सरकारी विद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं में यह बच्चे सम्मिलित होते हैं उससे आंकड़ा प्रभावित हो जाता है.

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Ankur Kumar

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