”Climate Smart” Technology:पूसा/बिरौली: बदलते मौसम के मिजाज और अनिश्चित मानसून ने खेती-किसानी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे में किसानों को अब पुरानी लकीर छोड़कर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की जरूरत है. समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को आगाह किया है कि अब ”परंपरागत” नहीं बल्कि ”जलवायु अनुकूल कृषि” ही भविष्य का आधार है. वैज्ञानिकों का कहना है कि तकनीक व समझ से ही अपनी खेती को बचा सकते हैंणविश्वविद्यालय के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली में आयोजित एक विशेष कृषक गोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जलवायु परिवर्तन का सीधा असर फसलों पर दिख रहा है. कभी बेमौसम बारिश तो कभी लंबे सूखे के कारण किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है.
सावधान! तापमान में 1°C की बढ़ोतरी छीन सकती है गेहूं की 17% पैदावार
गोष्ठी में साझा किए गए आंकड़े बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन कितना घातक हो सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, तापमान में मात्र 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से गेहूं जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार 15 से 17 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इसी तरह मानसून की अनियमितता धान की खेती को भी प्रभावित कर रही है, जिसका मुख्य कारण बढ़ता ग्रीनहाउस गैसों का स्तर है.बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिकों के सुझाव:
पूसा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने रबी सीजन में लक्ष्य के अनुरूप उत्पादन लेने के लिए ”स्मार्ट खेती” के मंत्र दिए:
उन्नत बीज:
रबी की खेती के लिए नए उन्नतशील और जलवायु के प्रति सहनशील बीजों का ही चयन करें.वैकल्पिक फसलें:
अधिक पानी वाली फसलों के बजाय ज्वार, बाजरा या चना जैसी फसलों को प्राथमिकता दें.तकनीकी सिंचाई:
पानी की बचत के लिए ड्रिप (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) का उपयोग करें.मिश्रित खेती:
एक साथ दो फसलें लगाएं, ताकि एक फसल खराब होने पर दूसरी से नुकसान की भरपाई संभव हो सके.मिट्टी का स्वास्थ्य:
मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रासायनिक खाद के बजाय जैविक और गोबर की खाद का उपयोग बढ़ाएं.आर्थिक सुरक्षा का कवच
प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचने के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल बीमा योजनाओं से अनिवार्य रूप से जुड़ने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और फसल बीमा के तालमेल से ही किसान इस बदलते मौसम में अपनी आय को सुरक्षित रख सकते हैं.
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