Bihar/Samastipur News:समस्तीपुर. बचपन जिस उम्र में खिलौनों और किताबों के बीच होना चाहिए, उस उम्र में मजबूरी और तस्करों के लालच ने मासूमों के कंधों पर कमाई का बोझ डाल दिया है. हालांकि, समस्तीपुर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की मुस्तैदी इन बच्चों के लिए ”फरिश्ता” साबित हो रही है. वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक) के आंकड़ों के मुताबिक, आरपीएफ ने ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत अब तक 71 बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें नई जिंदगी दी है.
तस्करों के जाल से 30 नाबालिग मुक्त
मानव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में आरपीएफ को बड़ी सफलता मिली है. कुल रेस्क्यू किए गए बच्चों में से 30 नाबालिगों को सीधे तौर पर तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित बचाए गए 71 बच्चों में 49 लड़के और 22 लड़कियां शामिल हैं. अकेले नवंबर माह में ही ऐसे 33 मामले सामने आए, जो रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाते हैं.पंजाब और हरियाणा था तस्करों का टारगेट
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. अधिकांश बच्चों को नौकरी और बेहतर भविष्य का लालच दिया गया था. पढ़ाई का झांसा देकर घर से दूर ले जाया जा रहा था. मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में मजदूरी के लिए भेजा जा रहा था. ये बच्चे समस्तीपुर जंक्शन के अलग-अलग प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए. इनमें से कुछ अकेले सफर कर रहे थे, तो कुछ को बहला-फुसलाकर ले जाया जा रहा था.
रेस्क्यू के बाद परिजनों से मिलन
आरपीएफ की विशेष टीम ने तत्परता दिखाते हुए इन बच्चों को रेस्क्यू किया. इसके बाद चाइल्ड लाइन के माध्यम से उनकी काउंसलिंग की गई और मेडिकल जांच के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई. अंततः इन बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया, जिससे कई बिछड़े हुए परिवार फिर से एक हो सके.आरपीएफ की अपील: जागरूक बनें नागरिक
आरपीएफ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ”ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” का मुख्य उद्देश्य बेसहारा, गुमशुदा और तस्करी के शिकार बच्चों को सुरक्षित निकालकर उनका पुनर्वास करना है. उन्होंने आम जनता से अपील की है कि: “यदि रेलवे परिसर या ट्रेनों में कोई भी बच्चा संदिग्ध अवस्था में अकेला दिखाई दे, तो तुरंत नजदीकी आरपीएफ पोस्ट या रेलवे कर्मचारी को सूचित करें. आपकी एक छोटी सी सूचना किसी मासूम का भविष्य बचा सकती है. “
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