रैन्समवेयर वायरस से सहमे बैंक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 May 2017 1:03 AM (IST)
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कंप्यूटर किए जा रहे सिक्योर ऑनलाइन बैंकिंग से बच रहे लोग समस्तीपुर : साइबर अटैक ने बैंकिंग तंत्र की पोल खोलकर रख दी है. जिले के अधिकांश एटीएम राशि व अन्य कारणों से ठप पड़े हुए हैं. इससे एक बार फिर नोटबंदी जैसा माहौल बनता जा रहा है. परेशान लोग भटकते नजर आ रहे हैं. […]
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कंप्यूटर किए जा रहे सिक्योर
ऑनलाइन बैंकिंग से बच रहे लोग
समस्तीपुर : साइबर अटैक ने बैंकिंग तंत्र की पोल खोलकर रख दी है. जिले के अधिकांश एटीएम राशि व अन्य कारणों से ठप पड़े हुए हैं. इससे एक बार फिर नोटबंदी जैसा माहौल बनता जा रहा है. परेशान लोग भटकते नजर आ रहे हैं. शाखाओं पर इसका दबाव देखने को मिल रहा है. प्रमुख ब्रांचों में भीड़ लगी रही. इधर, सूत्रों की मानें, तो रैन्समवेयर वायरस से बैंक सहम गये हैं. बचाव के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट का काम चल रहा है, लेकिन यह इतना धीमा है
कि अभी कुछ दिन लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है. जिले में विभिन्न बैंकों 252 एटीएम हैं. इसमें से अधिकांश पुराने सॉफ्टवेयर विंडो एक्सपी पर चल रहे हैं. इन्हें अपडेट करने की जहमत तक बैंकों ने नहीं उठाई. नाम नहीं छापने के शर्त पर एक बैंक अधिकारी ने बताया कि तीन दिन में 30 फीसदी एटीएम ही अपडेट हो सके हैं. इसमें कुछ और दिन लग सकते हैं. बैंक अपने कंप्यूटर सिस्टम को भी सुरक्षित कर रहे हैं. इन्हें सुरक्षित करने के लिए एंटीवायरस डाला जाता है. इस समय जिन सिस्टम में यह नहीं हैं, उन्हें सिक्योर किया जा रहा है.
विंडो एक्सपी पर चल रहा सिस्टम
बैंकों के सिस्टम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां माइक्रोसॉफ्ट विंडो एक्सपी है. आइटी एक्सपर्ट संजीत रावत के मुताबिक विंडो एक्सपी 25 अक्तूबर 2001 को लांच हुआ था. इसके बाद एमई, विस्टा, विंडो सात व आठ तक आ चुके हैं. आठ अप्रैल 2014 को माइक्रोसॉफ्ट ने विंडो एक्सपी को सपोर्ट करना बंद कर दिया था.
आउटडेटेड हो चुके सॉफ्टवेयर के हैक होने की आशंका काफी बढ़ जाती है. हैकर्स के कारनामों के कारण कैशलेस व्यवस्था को झटका लगा है. कई लोग ऑनलाइन बैंकिंग से कतरा रहे हैं. ताजपुर रोड स्थित व्यवसायी कृष्ण मुरारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद से वे ऑनलाइन बैंकिंग को ही तरजीह देने लगे थे. मगर, इस वायरस अटैक के बाद से वे बच रहे हैं. कारोबारी आकाश सिंह के मुताबिक उन्हें डर है कि इससे चलते कोई आर्थिक नुकसान न हो जाये, इसलिए बैंक में जाकर ही लेनदेन कर रहे हैं.
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