प्रभु कृपा हो, तो उसे कोई नहीं डूबो सकता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Mar 2017 8:24 AM (IST)
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पूसा : राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के परिसर में आयोजित श्री रामकथा में हिस्सा लिया. रामचरित्र मानस प्रचार संघ की ओर से आयोजित श्रीरामकथा में उन्होंने कहा कि जिस पर प्रभु की कृपा हो उसे कोई डूबो नहीं सकता और प्रभु जिसको डूबोना चाहे उसे कोई […]
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पूसा : राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के परिसर में आयोजित श्री रामकथा में हिस्सा लिया. रामचरित्र मानस प्रचार संघ की ओर से आयोजित श्रीरामकथा में उन्होंने कहा कि जिस पर प्रभु की कृपा हो उसे कोई डूबो नहीं सकता और प्रभु जिसको डूबोना चाहे उसे कोई बचा भी नहीं सकता. उन्होंने रामसेतु निर्माण प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि हनुमान जी पत्थर पर प्रभू श्रीराम का नाम लिखकर पानी में डालते जा रहे थे.
एक भी पत्थर नहीं पानी में नही डूबता था. जबकि वह तैरता रहता था. यह देखकर प्रभू श्री राम ने कहा हनुमानजी को बुलाया और कहा कि पत्थर डालते हो तो वह डूबता क्यों नहीं. इस पर प्रभू श्रीराम ने कहा कि जिस पर आपकी कृपा हो भला हो कैसे डूब सकता है. मैंने तो सिर्फ आपका नाम ही लिखकर समुद्र में डाल रहा हूं. प्रभू श्रीराम ने कहा कि एक पत्थर मुझे भी दो. उन्होंने उस पत्थर को यह कहते हुए डाला कि मैं तो खुद डाल रहा हूं, इसलिये इसमें नाम लिखने की क्या जरूरत है.वह पत्थर पानी में डालते ही डूब गया. इस पर हनुमान जी ने कहा कि जिस पर आपकी कृपा हो भला वह कैसे डूब सकता है और जिस पर आपकी कृपा नहीं हो, वह भला कैसे डूबने से बच सकता है.
राज्यपाल ने जगतगुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी का आर्शीवाद प्राप्त करने के बाद कहा कि स्वामी ने विश्व में पहला विकलांगों के लिये विश्वविद्यालय की स्थापना की. यह अपने आप में बहुत बड़ा कार्य हैं. 24 भाषा के जानकार एवं करीब डेढ़ सौ से अधिक पुस्तक लिखने वाले स्वामी जी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि महज सात साल की आयु में ही इन्हें रामचरित्र मानस पूरी तरह कंठस्थ हो गया था. महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण की रचना की.
संस्कृत बहुत कम लोग जानते थे इसलिये लोग आसानी से समझ सके इसके लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित्र मानस की रचना की. उन्होंने कहा कि वाल्मीकि और तुलसीदास को किसने गाइड किया.निसंदेह हन्नुमान जी ने. उन्होंने कहा कि हिन्दू सनातन धर्म में पुनजर्न्म की मान्यता है. पांच सौ, हजार साल बाद निसंदेह स्वामी जी को भी लोग उसी रूप में देखेंगे. राज्यपाल श्री कोविंद ने कुछ देर तक स्वामी जी के प्रवचन को भी सुना साथ ही उन्हें सम्मानित भी किया.
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