दो घंटे बावर्ची के हवाले रहा सदर

Published at :14 Jul 2016 2:55 AM (IST)
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दो घंटे बावर्ची के हवाले रहा सदर

सदर अस्पताल. इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं, फर्श पर दर्द से कराह रहा था मरीज समस्तीपुर : सदर अस्पताल के इमरजेंसी में बुधवार को डॉक्टर के नहीं रहने से परेशान मरीज व उनके परिजनों ने हंगामा किया. इस दौरान मारपीट में घायल एक मरीज फर्श पर उपचार के अभाव में दर्द से छटपटा रहा था. परिजनों […]

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सदर अस्पताल. इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं, फर्श पर दर्द से कराह रहा था मरीज

समस्तीपुर : सदर अस्पताल के इमरजेंसी में बुधवार को डॉक्टर के नहीं रहने से परेशान मरीज व उनके परिजनों ने हंगामा किया. इस दौरान मारपीट में घायल एक मरीज फर्श पर उपचार के अभाव में दर्द से छटपटा रहा था. परिजनों के काफी हो हल्ला के बाद अस्पताल के बावर्ची ने उसे दर्द की सूई दी. दिन के 12 बजे से करीब दो बजे तक अस्पताल बावर्ची राजेश कुमार व अन्य कर्मियों के हवाले रहा.
इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों की देखरेख कर्मी अपने हिसाब से कर रहे थे. अस्पताल में डॉक्टर के नहीं रहने के कारण हंगामे की सूचना पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ एएन शाही ने मौके पर पहुंच कर लोगों को शांत किया. उन्होंने घायल मरीजों के अलावा अन्य मरीजों की जांच की.
उन्होंने कहा कि ऑन ड्यूटी डॉक्टर बीपी राय से जवाब-तलब किया गया है. हालांकि डॉ बीपी राय ने कहा कि आज कोर्ट में उनकी गवाही थी. डीएस व सिविल सर्जन को सूचना देकर गवाही के लिए न्यायालय गये थे. कोर्ट निकले से पूर्व भी उन्होंने इमरजेंसी रजिस्टर में गवाही के लिए कोर्ट जाने की इंटरी की है.
बताया गया है कि सुबह आठ बजे से दिन के दो बजे डॉ बीपी राय की इंमरजेंसी में ड्यूटी थी. दिन के करीब 12 बजे वह इमरजेंसी रजिस्टर में यह लिख कर अचानक उठ गये कि गवाही देने के लिए कोर्ट जा रहे हैं. इमरजेंसी में दूसरे डॉक्टर की व्यवस्था की जाये. दिन के 12 बजे ओपीडी भी बंद हो जाता है. फलस्वरूप, इमरजेंसी में मरीज पहुंचने लगे. लेकिन डॉक्टर का चेंबर खाली रहने से मरीज इधर-उधर भटने लगे. दिन के करीब दो बजे तक इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं आये तो लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया.
बावर्ची ने दी सूई :इमरजेंसी में डॉक्टर के नहीं रहने के कारण जिले के कल्याणपुर थाने के परतापुर मारपीट में घायल अभिषेक कुमार दर्द से फर्श पर छटपटा रहे थे. इससे उनके परिजन हो हल्ला करने लगे. काफी देर बाद अस्पताल के बावर्ची राजेश कुमार ने उसे दर्द की सूई दी. इस दौरान अस्पताल उपाधीक्षक पहुंचे तब अभिषेक का सही से उपचार शुरू हुआ. बताया गया है कि अभिषेक को लोगों ने आपसी विवाद में मारपीट कर जख्मी कर दिया था.
नाराज मरीज व परिजनों का हंगामा
अस्पताल उपाधीक्षक ने संभाली कमान
अस्पताल के इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं रहने से हंगामा की सूचना पर डॉ एएन शाही पहुंच कर खुद मरीजों का उपचार शुरू किया. इस दौरान मारपीट में घायल के अलावा दर्जनभर से अधिक लोगों की उन्होंने जांच की. इस दौरान डॉ जयकांत भी पहुंच गये. तब डीएस वहां से गये. डीएस श्री शाही ने कहा कि डॉ राय ने कोर्ट जाने की पूर्व में सूचना नहीं दी थी. इस कारण समय पर डॉक्टर की व्यवस्था नहीं की जा सकी. उन्होंने खुद इलाज किया है.
गवाही के लिए डॉक्टर को सूचना की क्या है प्रक्रिया
किसी भी मामले में डॉक्टर की गवाही जरूरी है. पोस्टमार्टम अथवा मारपीट में घायल मरीजों के बारे में कोर्ट डॉक्टर मरीज का उपचार करने वाले डॉक्टर से पूछताछ करती है. इसके लिए न्यायालय सिविल सर्जन को संबंधित डॉक्टर को उपस्थित कराने के लिए सम्मन भेजती है. सिविल सर्जन अस्पताल उपाधीक्षक के माध्यम से संबंधित डॉक्टर को इसकी सूचना देते हैं. अब सवाल उठता है. जब डीएस ने डॉ राय को कोर्ट में गवाही की सूचना दी तो इमरजेंसी में डॉक्टर की व्यवस्था क्यों नही की गयी.
रजिस्टर में इंट्री कर कोर्ट गवाही देने चले गये डॉ बीपी राय
डीएस ने कहा, डॉ बीपी राय की थी ड्यूटी, किया गया जवाब-तलब
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