कटाई के बाद होने वाले नुकसान का आकलन जरूरी: डाॅ हाउन

Published at :07 Jan 2016 3:03 AM (IST)
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कटाई के बाद होने वाले नुकसान का आकलन जरूरी: डाॅ हाउन

पूसा : राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के संचार केंद्र में आरएयू और अमेरिका के इलियान विश्वविद्यालय के संयुक्त अनुसंधानिक प्रयास से फसल के कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश की जा रही है. अध्यक्षता करते हुए कुलपति डा. एकेपी सिंह ने कहा कि बिहार राज्य में कटाई उपरान्त होने वाले नुकसान […]

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पूसा : राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के संचार केंद्र में आरएयू और अमेरिका के इलियान विश्वविद्यालय के संयुक्त अनुसंधानिक प्रयास से फसल के कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश की जा रही है. अध्यक्षता करते हुए कुलपति डा. एकेपी सिंह ने कहा कि बिहार राज्य में कटाई उपरान्त होने वाले नुकसान को कम करने के लिए उचित प्रौद्योगिकी प्रसंस्करण करने पर बल दिया. देश में 12-16 लाख टन अनाज प्रति वर्ष उचित प्रसंस्करण के अभाव में नुकसान होता है.

जिसका मूल्य लगभग पच्चास करोड़ तक हो सकता है. इस कार्यक्र म के तहत अमेरिका से आये हुए 14 छात्र व 6 वैज्ञानिक छह दिनों तक आरएयू के चयनित छात्र व छात्राओं के साथ चलने वाले नवीनतम तकनीक से शोध कार्य सहित पठन-पाठन में सम्मिलित होंगे. इससे पूर्व कार्यक्र म का उद्घाटन अमेरिका स्थित इलियान विश्वविद्यालय के निदेशक डा. प्रशांता कलिता ने किया.

वहीं अमेरिकन वैज्ञानिक डा.लौरा हाउन ने अपने संबोधन में कहा कि फसलों में कटाई के उपरान्त होने वाले नुकसान का सर्वप्रथम आकलन कर लेना बेहद जरु री है. इसके अलावे दोनों ही विश्वविद्यालय के छात्र व छात्राएं संयुक्त रूप से शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव पर पहल करेंगे.

स्वागत भाषण देते हुए डा. प्रतिभा देवी शर्मा ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के अथक परिश्रम से खाद्य एवं प्रौद्योगिकी प्रसंस्करण विभाग के अंतर्गत समस्तीपुर एवं बेगूसराय के 36 गावं में इस परियोजना के तत्वावधान में कार्य संचालित किया जा रहा है. कार्यक्रम का संचालन इ. विशाल कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन इ. दिनेश रजक ने यिा. मौके पर बीसा प्रमुख डा. राज कुमार जाट के अलावे अधिष्ठाता, निदेशक एवं वैज्ञानिक मौजूद थे.
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