आपसी खींचतान से खतरे में कबीरपंथी मठ का अस्तित्व

मोहनपुर : डुमरी के ऐतिहासिक कबीरपंथी मठ का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है़ मठ न्यास समिति के कोषाध्यक्ष द्वारा मठ की जमीन बेचे जाने से संबंधित सदस्य आहत दिख रहे हैं. बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद् को न्यास समिति के उपाध्यक्ष ने पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है़ पर विडंबना यह कि परिषद […]
मोहनपुर : डुमरी के ऐतिहासिक कबीरपंथी मठ का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है़ मठ न्यास समिति के कोषाध्यक्ष द्वारा मठ की जमीन बेचे जाने से संबंधित सदस्य आहत दिख रहे हैं. बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद् को न्यास समिति के उपाध्यक्ष ने पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है़
पर विडंबना यह कि परिषद की निष्क्रियता कम नहीं हुई़ इ धर, न्यास समिति के सभी सदस्य पीछे हट गये, परंतु उपाध्यक्ष ने हार नहीं मानी है़ उपाध्यक्ष के हस्तक्षेप पर प्रशासन ने दोनों पक्षों को सिर्फ नोटिस भेजी़ तत्कालीन सीओ अनिल कुमार जांच कर चलते बने़ इस संबंध में उपाध्यक्ष ने अंचल कार्यालय से इस संबंध में जानना चाहा तो पता चला कि अंचलाधिकारी जांच के लिए स्थल पर गये ही नहीं.
तो सवाल उठता है कि जिलाधिकारी के जांच निर्देश का क्या हुआ़ यह आदेश अवहेलना का एक अलग मामला बनता है़ उपाध्यक्ष ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और इसकी सूचना धार्मिक न्यास परिषद् को दे दी, परंतु त्यागपत्र देने का कारण उनसे पूछना भी मुनासिब नहीं समझा गया़ त्यागपत्र दिये तीन वर्ष बीत गये और उपाध्यक्ष ने उच्च न्यायालय में रीट दायर कर रखी है़
पर शिथिल और सुस्त न्याय प्रक्रिया दीवानी मामले को गंभीरता से नहीं ले रही़ इसमें दो राय नहीं कि यह मामला कभी भी हिंसक रूप ले सकता है़ डुमरी बघड़ा स्थित कबीरपंथी मट को न्यास परिषद् से 20 जून 1956 को निंबंधित कराया गया था़
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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