बागों में अंतरवर्ती फसल अतिरिक्त आय का साधन : डॉ राय

आम के बगीचे में अदरक की अंतरवर्ती खेती लाभकारीअंतरवर्ती फसलांे के चुनाव पर समुचित ध्यान देना जरु री प्रतिनिधि, पूसा राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ पीके राय ने बताया कि बागों में अंतरवर्ती फसल अतिरिक्त आय के लिए मुख्य स्रोत है. जब एक समय में एक ही जमीन पर मुख्य फसल के साथ साथ […]
आम के बगीचे में अदरक की अंतरवर्ती खेती लाभकारीअंतरवर्ती फसलांे के चुनाव पर समुचित ध्यान देना जरु री प्रतिनिधि, पूसा राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ पीके राय ने बताया कि बागों में अंतरवर्ती फसल अतिरिक्त आय के लिए मुख्य स्रोत है. जब एक समय में एक ही जमीन पर मुख्य फसल के साथ साथ एक अन्य फसल कतारों के मध्य उगायी जाये तो उसे अंतरवर्ती फसल कहा जाता है. बहुवर्षी फलों में आम, लीची, कटहल, अमरु द, आंवला आदि के पौधे आरंभ के 2-5 वषार्ें तक केवल पौधे में वृद्धि करती है. इसके बाद ही फल देना शुरू करता है. इस दौरान पौधे के बीच के खाली जगह में अन्य लघुकालीन फसलंे उगाकर बागबान अतिरिक्त आय कमा सकता है. वृक्षो में पूर्णरूपेण फल आने में 4 से 5 और 10 से 12 वषार्ें का समय लगता है. बिहार के किसानों से खासतौर से आग्रह है कि अपने बागों में अंतरवर्ती फसल के रूप में अदरख एवं ओल का चुनाव कर सकते हैं. इससे अच्छी आमदनी लिया जा सकता है. पारंपरिक तौर पर आम और लीची के पौधे को 10 गुना 10 मीटर की दूरी पर लगाये जाते हैं. आरंभिक वषार्ें में बगीचे के कुल क्षेत्र के 80 प्रतिशत हिस्सा अंतरवर्ती फसलों के लिए उपलब्ध रहता है. दस से बारह वर्ष आते आते नीचे की पूरी भूमि छायादार हो जाते हैं. इससे अंतरवर्ती फसल लेना नामुमिकन हो जाता है.
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