पंजाब से गेहूं व ओड़िशा से आ रहा चावल
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :15 Jun 2015 8:21 AM
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समस्तीपुर : जिले की जन वितरण प्रणाली हो या मध्याह्न् भोजन योजना जिलावासी अन्य राज्यों से आयातित अनाज पर ही निर्भर है. जिले की खाद्यान्न आपूर्ति का अधिकतर श्रोत हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसान हैं. जिनकी पैदावार आज यहां के बच्चों का निवाला बन रहे हैं. भारतीय खाद्य निगम की ओर से इन योजनाओं को […]
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समस्तीपुर : जिले की जन वितरण प्रणाली हो या मध्याह्न् भोजन योजना जिलावासी अन्य राज्यों से आयातित अनाज पर ही निर्भर है. जिले की खाद्यान्न आपूर्ति का अधिकतर श्रोत हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसान हैं. जिनकी पैदावार आज यहां के बच्चों का निवाला बन रहे हैं.
भारतीय खाद्य निगम की ओर से इन योजनाओं को उपलब्ध किया गया खाद्यान्न बाहरी राज्यों से आता है. इसमें गेहूं का मुख्य आवक पंजाब, हरियाणा व मध्य प्रदेश है. इसी तरह चावल छत्तीसगढ़, ओडिशा, पंजाब व हरियाणा से आता है. बाहरी राज्यों से खाद्यान्न आने के कारण इन पर सरकार को करोड़ों की राशि खर्च करनी पड़ती है. औसतन एक रैक के आगमन पर विभाग को रेलवे को 50 लाख रुपये तक का किराया देना पड़ता है. वहीं इसमें लदी खाद्यान्न की कीमत छह करोड़ रुपये के आसपास होती है. हालांकि विभाग राज्य के अंदर से भी अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करता है. लेकिन इसकी मात्र काफी कम होती है.
पहली बार चावल की जिले में उपलब्धता इस बार राज्य के अन्य जिलों से की गयी है. इस बाबत भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक अजरुन क ुमार यादव ने बताया कि राज्य के अंदर के जिलों से अगर खाद्यान्न मिल जाता है तो उस पर विभाग को परिवहन पर खर्च की बचत होती है. हालांकि यह कभी कभार ही होता है.
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