औने-पौने दाम में किसान बेच रहे धान

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समस्तीपुर : ‘अगहन पंद्रह, चैतक आठ जहां जहां मन हो तहां तहां काट’ यह जुमला कभी धान और रबी फसलों के तैयार होने को लेकर किसानों की जुबां पर होते थे. वैज्ञानिक खेती के इस दौर में अगहन की जगह खरीफ फसलों की तैयारी का महीना नवंबर ने ले लिया. जिला सहकारिता के आंकड़े बोलते […]

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समस्तीपुर : ‘अगहन पंद्रह, चैतक आठ जहां जहां मन हो तहां तहां काट’ यह जुमला कभी धान और रबी फसलों के तैयार होने को लेकर किसानों की जुबां पर होते थे. वैज्ञानिक खेती के इस दौर में अगहन की जगह खरीफ फसलों की तैयारी का महीना नवंबर ने ले लिया.
जिला सहकारिता के आंकड़े बोलते हैं कि इस वर्ष जिले में धान की खरीद के लिए 53600 मीटरिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है. इसकी जिम्मेदारी जिले के विभिन्न पंचायतों में फैले 335 पैक्सों व 20 व्यापार मंडलों को सौंपी गयी है. किसानों को हाथों हाथ राशि मिले इसके लिए 160 पैक्सों को ही 3 लाख रुपये की दर से कैश क्रेडिट राशि उपलब्ध कराये गये हैं. विभाग का दावा है कि 48 घंटे के अंदर किसानों को उनका पैसा उपलब्ध कराया जा रहा है. लेकिन धरातल पर क्रय केंद्र की स्थिति व विभाग के आंकड़े में समानता नजर नहीं आ रही है. कई पैक्सों में अब तक धान की खरीद शुरू नहीं हुई है. रोसड़ा पैक्स राशि के अभाव में बंद पड़ा किसानों का मुंह चिढ़ा रहा है.
पैक्स अध्यक्ष शंकर महतो की मानें तो पैसा दूर उन्हें गाइड लाइन भी नहीं मिला है. ऐसे में धान की खरीदारी का हाल जमीन पर स्वत: स्पष्ट हो रहा है. इसका सीधा फायदा बिचौलियों को मिलना तय माना जा रहा है. किसानों का कहना है कि उन्हें रबी फसलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसा चाहिए. पैक्स धान लेगा नहीं तो व्यापारियों के हाथ उन्हीं की कीमत पर बेचना मजबूरी है. उन्हें 1 हजार से 11 सौ रुपये के बीच रकम व्यापारी देते हैं. इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. कुछ मध्यम वर्गीय किसान अब तक क्रय केंद्र खुलने की प्रतीक्षा में धान की बोरिया दरवाजे पर रख छोड़ा है. लेकिन क्रय केंद्र खुलने में होने वाली देर से परेशानियों की लकीरें उनके चेहरे पर भी साफ नजर आने लगी है.
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