मजदूर हैं इसलिए मजबूर हैं...

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रोसड़ा. गरीब हैं मजदूर हैं इसलिए मजबूर हैं़ ये दर्द भरी दास्तां शहर के चौक-चौराहों पर दिन रात मौजूद रहकर लोगों की सेवा कर परिवार का भरण पोषण करने वाले गरीब- मजदूरों के हैं़ इस भीषण ठंड एवं शीतलहर में सरकार, प्रशासन एवं सामाजिक सरोकार की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले शहर के तथाकथित समाजसेवियों के […]

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रोसड़ा. गरीब हैं मजदूर हैं इसलिए मजबूर हैं़ ये दर्द भरी दास्तां शहर के चौक-चौराहों पर दिन रात मौजूद रहकर लोगों की सेवा कर परिवार का भरण पोषण करने वाले गरीब- मजदूरों के हैं़ इस भीषण ठंड एवं शीतलहर में सरकार, प्रशासन एवं सामाजिक सरोकार की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले शहर के तथाकथित समाजसेवियों के उपेक्षात्मक रवैये के कारण गरीब एवं मजदूर तबके के लोगों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है़ सर्वाधिक परेशानी फूटपाथ पर रहकर दिन रात मेहनत मजदूरी करने वाले रिक्शा, ऑटो रिक्शा चालकांे एवं दैनिक मजदूरों को हो रही है़ ठंड के तीखे तेवर को देखते हुए भले ही सरकारी स्तर से चौक-चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था करने संबंधी फरमान जारी किये गये हों लेकिन जमीनी स्तर पर सरकारी फरमान का अनुपालन नहीं होने से समाज के गरीब-मजदूर तबके की परेशानी बढ़ गयी है़ सिनेमा चौक, महावीर चौक, बड़ी दुर्गा स्थान, गांधी चौक पर मौजूद रिक्शा चालक सतेन्द्र कुमार, राहुल पासवान, राजेश सदा, राजो दास, पुलकित सहनी आदि का कहना है कि प्रशासनिक स्तर से यदि प्रमुख चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था कर दी जाती तो ठंड से संघर्ष करने में आमजनों को थोड़ी राहत मिलेगी़ इसी तरह ग्राम पंचायतों में भी मुखिया स्तर से फडिंग के अभाव में कहीं भी अलाव की व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है.

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