बिखर गये रोशनी की जगी आस

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सिंघिया. बिजली की तलाश में वषार्े वर्ष की जगी आस टूटकर बिखरने लगे तो उसे आप क्या कहेंगे. यह बात प्रखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिष्णुपुर डीहा गांव की है़ 1956 के बाद आजादी मिली़ पर नहीं मिली बिजली़ आजादी के 58 वें साल में खंभा गारा गया़ तार बिछाया गया़ […]

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सिंघिया. बिजली की तलाश में वषार्े वर्ष की जगी आस टूटकर बिखरने लगे तो उसे आप क्या कहेंगे. यह बात प्रखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिष्णुपुर डीहा गांव की है़ 1956 के बाद आजादी मिली़ पर नहीं मिली बिजली़ आजादी के 58 वें साल में खंभा गारा गया़ तार बिछाया गया़ ट्रांसफॉर्मर लगाया गया़ बिजली की सप्लाई तार में दिया गया़ पहली बार कई खंभों पर जलता हुआ बल्ब से झकाझक रोशनी ने प्रसन्नता बिखेर दी़ सड़क मुस्कुराया, गली गली मुस्कुरायी़ गांव के बूढ़े बुजुर्ग के अलावा की जुबान पर मुस्कुराहट की किलकारी थी़ फिर बीपीएल परिवार के लगभग एक सौ लोगों को कनेक्शन दिया गया़ जिसमें कई कनेक्शन में नाम किसी का घर किसी और का के रूप में करके तो कोई खंभे से तार खिंचकर अवैध रूप से जलाना शुरू किया़ जिसमें एक ट्रांसफॉर्मर जल गया़ शेष दो ट्रांसफॉर्मर से बिजली लोगों को मिल रही थी़ फिर अपने आपको लोगों से बिजली विभाग के कर्मी बताकर एक ट्रांसफॉर्मर के तार को काट दिया़

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