सेवा केंद्र खाताधारियों के पैसे की जिम्मेदारी किसकी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Aug 2017 3:51 AM (IST)
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सवाल . बैंकों के ग्रामीण क्षेत्र में व्यवसाय पर दिखेगा असर समस्तीपुर : सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब गुरबों को उनके गांव घर में ही बैंक की सुविधा मुहैया कराने वाली योजना ग्राहक सेवा केंद्र के खाताधारी अपनी जमा राशि को लेकर आशंकित हो रहे हैं. खाताधारी अपनी जमा पूंजी की सुरक्षा की […]
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सवाल . बैंकों के ग्रामीण क्षेत्र में व्यवसाय पर दिखेगा असर
समस्तीपुर : सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब गुरबों को उनके गांव घर में ही बैंक की सुविधा मुहैया कराने वाली योजना ग्राहक सेवा केंद्र के खाताधारी अपनी जमा राशि को लेकर आशंकित हो रहे हैं. खाताधारी अपनी जमा पूंजी की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस पर डालें यह सवाल उनके जेहन में बार बार कौंध रहा है. क्योंकि अब तक जिले में दो मामले ऐसे सामने आ चुके हैं जिसमें केंद्र के खाताधारियों को सड़क पर उतरना पड़ा है. संबंधित बैंकों के दरवाजे खटखटाने पड़े हैं.
ग्राहक सेवा केंद्र की बुनियाद और उसके क्रियाकलाप पर बारीकी से जानकारी रखने वाले बैंक के पदाधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को छोटी जमा निकासी के लिए उनके घर पर ही सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से ग्राहक सेवा केंद्र खोला गया. फ्रेंचाइजी के माध्यम से चलने वाले इस केंद्र से जुड़ने वाले खाताधारी सीधे बैंकों से नहीं जुड़ते बल्कि उनकी जगह फ्रेंचाइजी संचालक का खाता बैंक से जुड़ता है. वह खाताधारियों से जमा ली गयी रकम को अपने खाते के माध्यम से जमा निकासी करायेगा. खाताधारियों को जमा रकम के एवज में कंप्यूटराइज रसीद देनी है. जमा निकासी के वक्त आधार वाला अंगूठा भी लगाने का नियम है.
नियमों का नहीं हो रहा पालन
सूत्र बताते हैं कि कुछेक केंद्रों को छोड़ दें तो अधिकतर केंद्रों में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है. न तो खाताधारियों को कंप्यूटराइज रसीद मिल रही है और न ही उनका कोई अंगूठे ही लिये जाते हैं. ऐसे में रकम को लेकर पूरी तरह से केंद्र संचालक ही जिम्मेदार हो रहे हैं. अब संचालक पैसा बैंक में पहुंचा रहे हैं या नहीं यह किसी को पता नहीं होता. बैंक भी जमा पूंजी को लेकर गफलत में होती है. क्योंकि नियमानुसार उसकी कहीं कोई जांच नहीं हो रही है. इसका नमूना दलसिंहसराय और जितवारपुर में सामने आ चुका है. जहां अपनी ही जमा राशि को लेकर खाताधारियों को हंगामा करना पड़ रहा है. जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जब बैंक ग्राहक सेवा केंद्र खोलने की अनुमति देती है तो जमा रुपयों की गारंटी भी उन्हें ही देनी होगी. इसके विपरीत बैंक उन्हीं खाताधारियों के दावा का भुगतान अपने विवेक के अनुसार करती है जिनके पास कंप्यूटराइज रसीद और जमा के अंगूठे कंप्यूटर में प्राप्त होते हैं. जिससे सवाल पैदा होता है कि बाकी खाताधारियों के रकम की जिम्मेदारी किसकी होगी. बताते चलें कि जिले में विभिन्न बैंकों के करीब 650 ग्राहक सेवा केंद्र हैं. जिससे हजारों की संख्या में लोग जुड़कर अपनी करोड़ों रुपये जमा कर रखे हैं.
संचालक की कारगुजारियों से जमा राशि को ग्राहक सशंकित
सर्किल स्तर से जारी
हो रहा लाइसेंस
एलडीएम कार्यालय के वित्तीय साक्षरता सहायक एसके झा कहते हैं कि फ्रेंचाइजी आवेदन आरबीएफआई को करना है. वह चीफ मैनेजर को आवेदन भेजेगा. यहां से एजीएम की स्वीकृति मिलेगी. तब सर्किल स्तर से लाइसेंस जारी करने का प्रावधान है. इसके इतर आवेदक को सर्कि ल स्तर से ही लाइसेंस सीधे मिल रहा है. इतना ही नहीं प्रति सप्ताह सेवा केंद्र का प्रबंधक को निरीक्षण करना है. 1 महीने पर मुख्य प्रबंधक और 3 महीने पर एजीएम के माध्यम से इसकी जांच पड़ताल होनी है. लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है.
दलसिंहसराय व विसनपुर में सामने आया गड़बड़झाला
दलसिंहसराय में बीते महीने एसबीआई एडीबी के ग्राहक सेवा केंद्र के पांच सौ खाताधारियों ने अपनी रकम को लेकर हंगामा किया. इसके बाद मामला जब बैंक तक पहुंचा तो बारी बारी से खाताधारियों की रकम वापस की जाने लगी. तब जाकर ग्राहकों को थोड़ा सुकून मिला. करीब ढाई सौ लोगों का पैसा अभी भी फंसा है. 29 जुलाई की शाम विसनपुर में एसबीआई ग्राहक सेवा केंद्र के संचालक को घेर कर लोगों ने अपनी रकम वापसी को लेकर सड़क जाम कर हंगामा किया. संचालक तो फरार हो गये. लेकिन मामला अटका हुआ है. इस केंद्र की खाताधारी शाहनाज खातून, सौम्या देवी, कंचन देवी, कृष्णा देवी आदि का कहना है कि मेरी जमा पूंजी अब डूबती हुई नजर आ रही है. ग्राहकों के रुपये कौन लौटायेगा.
गत दिनों डीएलसीसी की बैठक में ग्राहक सेवा केंद्र के निरीक्षण का मुद्दा उठा था. बैंकों को निरीक्षण कर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है. देनदारी के मामले पर बैंक जांच कर ही स्वेच्छा से भुगतान करेगा.
आरके चौधरी,
एलडीएम, समस्तीपुर
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