एक साथ उठी तीन अर्थियां, चीत्कार से गूंज उठा गांव

Updated at : 25 Mar 2026 6:43 PM (IST)
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एक साथ उठी तीन अर्थियां, चीत्कार से गूंज उठा गांव

सलखुआ प्रखंड के तीन मजदूर सनोज चौधरी, ज्योतिष कुमार और मसिंद्र सदा का शव बुधवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में मातम पसर गया.

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शव पहुंचते ही मच गया कोहराम

सिमरी बख्तियारपुर. प्रयागराज में हुए कोल्ड स्टोरेज हादसे में जान गंवाने वाले सलखुआ प्रखंड के तीन मजदूर सनोज चौधरी, ज्योतिष कुमार और मसिंद्र सदा का शव बुधवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में मातम पसर गया. शव देखते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. मृतकों के घर में मातम छा गया और चीख पुकार से पूरा गांव गूंज उठा. मृतकों की मां, पत्नी और बच्चों के करुण क्रंदन को सुनकर आसपास के लोग भी खुद को संभाल नहीं पाये. गांव के लोग लगातार परिजनों को ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर ओर दर्द और सिसकियां ही सुनाई दे रही थीं.

कबीर अंत्येष्ठि का दिया गया पैसा

मृत मजदूरों का शव गांव पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. सैकड़ों की संख्या में लोग मृतकों को अंतिम विदाई देने पहुंचे. हर किसी की आंखें नम थीं. ग्रामीणों ने कहा कि मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए परदेस गये थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. इधर बुधवार को पंचायत सचिव तपेश कुमार द्वारा सभी मृतक परिवार को कबीर अंत्येष्ठि योजना के तहत तीन-तीन हजार रुपये दिया गया.

कमाने गये थे परदेस, लाश बनकर लौटे घर

कोसी इलाके में रोजगार के अभाव के कारण बड़ी संख्या में मजदूरों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है. प्रयागराज में हुआ यह हादसा इस कड़वी सच्चाई को फिर सामने ले आया है. रोजी-रोटी की तलाश में उत्तर प्रदेश गये मजदूर काम के दौरान हादसे का शिकार हो गये और अब उनका शव ही गांव वापस लौटा.

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मजदूरों की मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. घर का कमाने वाला सदस्य ही इस हादसे में चला गया. मृतकों के पीछे वृद्ध मां, पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे रह गये हैं. मृतक ज्योतिष कुमार की पत्नी रीता देवी अपने दो छोटे बच्चों के साथ पति के शव के पास विलाप करती रही. वहीं मसिंद्र सदा का शव गांव पहुंचते ही उनकी मां फूलो देवी बेसुध हो गयी. कबीरा पंचायत के वार्ड संख्या 12 निवासी सनोज चौधरी की मौत के बाद उनके परिवार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. पत्नी मुन्नी देवी ने बताया कि परदेश में मजदूरी कर जो पैसे आते थे, उसी से घर चलता था. अब परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, यह चिंता सभी को सता रही है.

सरकार से मुआवजे और सहायता की मांग

मजदूरों की मौत के बाद गांव में शोक के साथ आक्रोश भी देखा जा रहा है. ग्रामीणों और परिजनों ने सरकार से मृतकों के परिवारों को जल्द उचित मुआवजा और सरकारी सहायता देने की मांग की है. भाकपा नेता ओम प्रकाश नारायण ने मृतक परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है.

एक माह के पुत्र ने दी मुखाग्नि

बुधवार को मृतकों के शव पहुंचने के बाद कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला. लोग दिन भर मृतकों के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देते रहे. गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन रहा और चौक-चौराहों पर भी लोग इसी घटना की चर्चा करते नजर आये. मृत मजदूरों का अंतिम संस्कार बुधवार को गमगीन माहौल में किया गया. बताया जाता है कि मृतक सनोज चौधरी को उनके पुत्र शिवम कुमार ने मुखाग्नि दी, जबकि मसिंद्र सदा को उनके छोटे भाई ने मुखाग्नि दी. वहीं ज्योतिष कुमार को उनकी पत्नी और एक माह के पुत्र की ओर से अंतिम संस्कार की रस्म पूरी करायी गयी. मौके पर सलखुआ बीडीओ वीरेंद्र कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मनोज कुमार और सीओ पुष्पांजलि कुमारी सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.

सांसद प्रतिनिधि ने शोकाकुल परिजनों को बंधाया ढांढस

सांसद प्रतिनिधि सह भाजपा नेता रितेश रंजन ने तीनों मृतकों के शव गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही गांव पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया. उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है. मजदूर परिवारों पर जो विपत्ति आई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है, लेकिन सरकार से हर संभव सहायता दिलाने के लिए वे प्रयास करेंगे.

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