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सोलर ड्रायर लगा उत्पाद रखती है सुरक्षित, बारिश व कीड़ों से सुरक्षित रहती है उत्पाद

Updated at : 07 Sep 2025 5:59 PM (IST)
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सोलर ड्रायर लगा उत्पाद रखती है सुरक्षित, बारिश व कीड़ों से सुरक्षित रहती है उत्पाद

सोलर ड्रायर लगा उत्पाद रखती है सुरक्षित, बारिश व कीड़ों से सुरक्षित रहती है उत्पाद

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बसंती कुमारी का कृषि के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम विनय कुमार मिश्र, सहरसा जिले की बसंती कुमारी ने सोलर ड्रायर सूर्यकुंड बनाया है. जो बिजली के बिना सूर्य की ऊर्जा से वस्त्र सुखाता है. यह यूवी प्रोडक्ट प्लास्टिक से बना है व बारिश व कीड़ों से सुरक्षित है. बसंती कुमारी ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक अनोखा व उपयोगी उदाहरण पेश किया है, जिसने बिहार में नई टेक्नोलॉजी अपनाने की दिशा में एक मिसाल कायम की है. बसंती कुमारी ने साउथ एरिया से मिली प्रेरणा एवं तकनीकी ज्ञान को अपनाकर सहरसा में एक खास तरह का सोलर ड्रायर, जिसे सूर्यकुंड भी कहा जाता है उस सूरजकुंड का निर्माण कराया है. यह सूर्य कुंड शेड की तरह बना हुआ है व इसका मुख्य मकसद बिजली के बिना, केवल सूर्य की ऊर्जा से विभिन्न वस्तुओं को सुखाना है. बिहार जैसे राज्य में जहां बिजली की कमी व मौसम की अनियमितता आम समस्या है. वहां इस तरह का नवीनतम सोलर ड्रायर बहुत कारगर साबित हो सकता है. इस सोलर ड्रायर की सबसे खास बात यह है कि यह यूवी प्रोडक्ट प्लास्टिक से बना है. इस सामग्री का उपयोग इसलिए किया गया है कि शेड के अंदर तापमान प्राकृतिक सूर्य की गर्मी की मदद से उच्च स्तर तक पहुंच सके. इस गर्माहट की वजह से यहां पर किसी भी तरह की वस्तु- चाहे वह बड़ी हो, अनाज हो, मसाले या अन्य खाद्य पदार्थ- सफलतापूर्वक सुखाए जा सकते हैं. सूरजकुंड का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें बारिश या नमी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता. इसकी संरचना ऐसे डिजाइन की गयी है कि पानी अंदर नहीं घुस सकता एवं ना ही कोई कीड़े-मकोड़े इसकी सामग्री को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए, इस शेड में रखा सामान सुरक्षित रहता है एवं पूरी तरह से स्वच्छ वातावरण में सुखाया जा सकता है. सोलर ड्रायर एक क्रांतिकारी कदम जानकारी देते हुए बसंती कुमारी बताती हैं कि वह बरी उद्योग का कारोबार करती हैं. जिसमें प्रतिदिन 80 से 90 किलो बरी तैयार की जाती है. जिसे सुखाने के लिए ये सोलर ड्रायर का निर्माण कराया गया है. इस सोलर ड्रायर बनाने का उद्देश्य केवल बिजली बचाना ही नहीं है. बल्कि ऐसे वातावरण बनाना भी है जहां उत्पाद जल्दी व बेहतर तरीके से सूखें. जिससे उनकी गुणवत्ता बनी रहे. इससे व्यापार करने में लाभ मिलता है व कुल मिलाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है. उन्होंने कहा कि जिले में जहां किसान व छोटे उद्यमी अपने उत्पादों को बेहतर बनाने व बाजार तक पहुंचाने के लिए हमेशा नए उपाय खोजते रहते हैं. वहां इस तरह का सोलर ड्रायर एक क्रांतिकारी कदम है. इसके इस्तेमाल से ना केवल उत्पाद जल्दी सूखेंगे, बल्कि मौसम की मार से भी उनका बचाव होगा. किसानों व छोटे व्यवसायियों के लिए है मददगार इस नई टेक्नोलॉजी को लेकर जिले में चर्चा जोरों पर है. कई लोग इसे हर क्षेत्र में अपनाने की सलाह दे रहे हैं. उम्मीद है कि आने वाले समय में इस तरह के और भी सोलर ड्रायर तैयार किये जाएंगे. इस प्रोजेक्ट में लगभग पांच लाख रुपए का खर्च हुआ. यह राशि सूर्य कुंड के निर्माण के लिए इस्तेमाल की गयी है. जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले यूवी प्रोडक्ट प्लास्टिक व अन्य सामग्री शामिल हैं. बसंती कुमारी ने इस प्रयास से यह दिखाया है कि टेक्नोलॉजी के साथ सही विचार व लगन मिलकर दैनिक जीवन में बड़ी समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं. सोलर ड्रायर जैसा उपकरण किसानों व छोटे व्यवसायियों के लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है. इससे वे अपने उत्पाद को आसानी से और सुरक्षित तरीके से सुखा सकते हैं बिना बिजली के खर्च के.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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