सहरसा में 49 लाख गबन का आरोपी पूर्व पैक्स अध्यक्ष डेढ़ साल से फरार, किसानों का पैसा अब तक अटका

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Saharsa PACS Scam

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Saharsa PACS Scam: धान खरीद कर खुले बाजार में बेचने का आरोप. भुगतान नहीं मिलने से किसानों में भारी आक्रोश, पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल

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Saharsa PACS Scam: मुकेश कुमार सिंह, सोनवर्षाराज. सोनवर्षाराज के पड़रिया पैक्स में लाखों रुपये गबन का मामला एक बार फिर चर्चा में है. करीब 49 लाख 96 हजार 783 रुपये के गबन के आरोपी पूर्व पैक्स अध्यक्ष मुकेश यादव डेढ़ वर्ष बाद भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं. उन पर विभागीय राशि गबन के साथ-साथ किसानों से धान खरीद कर भुगतान नहीं करने का गंभीर आरोप है. मामले को लेकर इलाके के किसानों में भारी नाराजगी है.

किसानों का आरोप. धान लिया, लेकिन भुगतान नहीं किया

स्थानीय किसानों का कहना है कि वर्ष 2022 में पैक्स के माध्यम से धान खरीदने के बाद अब तक भुगतान नहीं किया गया. अरसी पंचायत निवासी किसान नित्यानंद सिंह और चंदन सिंह ने बताया कि पूर्व पैक्स अध्यक्ष ने उनसे बड़ी मात्रा में धान खरीदा था.

नित्यानंद सिंह के अनुसार उनसे करीब 65 क्विंटल धान लिया गया, जबकि चंदन सिंह से 22 क्विंटल धान खरीदा गया था. दोनों किसानों का लगभग 1 लाख 75 हजार रुपये बकाया है. किसानों का आरोप है कि क्षेत्र के कई अन्य किसानों का भी लाखों रुपये भुगतान बाकी है.

खुले बाजार में धान बेचने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि किसानों से खरीदे गए धान को खुले बाजार में बेच दिया गया, लेकिन किसानों को उनका पैसा नहीं मिला. इस मामले में पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक पीड़ित किसानों को राहत नहीं मिल सकी है.

डेढ़ साल पहले दर्ज हुई थी प्राथमिकी

जानकारी के अनुसार सीएमआर जमा नहीं करने के मामले में सोनवर्षा के तत्कालीन बीसीओ प्रफुल चंद्र दास द्वारा करीब डेढ़ वर्ष पूर्व सोनवर्षा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इसके बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.

हाल ही में फरार पैक्स प्रबंधक मुकेश कुमार सिंह के घर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की गई थी. वहीं पूर्व अध्यक्ष मुकेश यादव के घर भी कुर्की-जब्ती संबंधी सूचना चिपकाई गई थी.

पुलिस और प्रशासन क्या कह रहा

सोनवर्षा थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष विवेक कुमार ने बताया कि सूचना मिली है कि आरोपी को बेल मिल चुकी है, लेकिन अदालत के आदेश की प्रति अभी थाना को प्राप्त नहीं हुई है.

वहीं बीसीओ सचीन कुमार ने कहा कि गबन के मामलों में राहत तभी मिलती है जब आरोपी विभागीय बैंक में राशि जमा करे. फिलहाल गबन की राशि जमा नहीं की गई है.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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