सहरसा के कहरा गांव में मिला 500 साल पुराना दुर्लभ पांडुलिपि खजाना, ज्ञान भारतम मिशन को मिली बड़ी सफलता

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 02 Jun 2026 3:19 PM

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सहरसा - पांडुलिपि देखते दल सदस्य

Saharsa News: सहरसा के एक निजी पुस्तकालय से 400 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह मिलने के बाद इतिहास, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के शोधकर्ताओं में उत्साह बढ़ गया है. ज्ञान भारतम मिशन के सर्वेक्षण में मिली यह खोज मिथिला की बौद्धिक विरासत को नई पहचान दिला सकती है.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट.

Saharsa News: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम मिशन परियोजना के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में सहरसा जिले को बड़ी सफलता मिली है. जिला मुख्यालय से सटे कहरा गांव में एक परिवार के निजी पुस्तकालय से लगभग 400 से 500 वर्ष पुरानी बहुमूल्य और दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह प्राप्त हुआ है. इस खोज को मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

कहरा गांव के पुस्तकालय में मिला ज्ञान का खजाना

जिलाधिकारी दीपेश कुमार के मार्गदर्शन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी झा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने कहरा गांव में विशेष सर्वेक्षण किया. इस दौरान 75 वर्षीय सेवानिवृत्त कृषि निदेशक अभय कांत ठाकुर के आवास पर संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह सामने आया.

अभय कांत ठाकुर ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से विद्या, संगीत और संस्कृत अध्ययन की समृद्ध परंपरा रही है. उनके नाना बलराम झा और पिता भागवत झा ने वर्षों पहले इन दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को संरक्षित किया था. आज भी उनके निजी पुस्तकालय में हजारों पुस्तकें और ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं.

ज्योतिष, वास्तु और शास्त्रीय ज्ञान का भंडार

उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय, महिषी के वेद संकायाध्यक्ष एवं प्राचीन लिपि विशेषज्ञ डॉ. आनंद दत्त झा ने पांडुलिपियों का अध्ययन करने के बाद बताया कि इनमें ज्योतिष, वास्तु विज्ञान, वर्षकृत्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की सामग्री मौजूद है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इन पांडुलिपियों का गहन अध्ययन भारतीय परंपरागत ज्ञान, मिथिला की विद्वत संस्कृति और प्राचीन शिक्षा व्यवस्था के कई अनछुए पहलुओं को सामने ला सकता है.

शोधकर्ताओं के लिए खुलेंगे नए द्वार

दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज के संस्कृत विभाग से जुड़े एक विद्वान ने भी इन पांडुलिपियों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना है कि सहरसा और आसपास के क्षेत्रों में संरक्षित पांडुलिपियों पर व्यापक शोध की आवश्यकता है. इससे मिथिला की समृद्ध बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है.

15 जून तक जारी रहेगा सर्वेक्षण अभियान

जिला प्रशासन के अनुसार जिले में पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य 15 जून तक जारी रहेगा. जिलाधिकारी दीपेश कुमार और जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी झा ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास किसी भी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ऐतिहासिक दस्तावेज हों तो इसकी जानकारी सर्वेक्षण दल को दें, ताकि उनका वैज्ञानिक संरक्षण और दस्तावेजीकरण किया जा सके.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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